अंबानी-अडानी का ही विरोध क्यों? राकेश टिकैत से किया सवाल, जवाब देने लगे तो एंकर बोले- कुछ बेचा होता तो आपसे पहले मैं खड़ा होता

राकेश टिकैत ने सरकार पर देश की संपत्ति बेचने का आरोप लगाया, जिसपर न्यूज एंकर ने कहा कि अगर एक भी चीज बेची होती तो आपसे पहले मैं खड़ा होता।

TV Debate, Anchor Aaj tak किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो सोर्स – पीटीआई)

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में किसान बीते कई महीनों से दिल्ली के बॉर्डर पर रहकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर राकेश टिकैत ने बीते दिन सुदर्शन न्यूज के संपादक सुरेश च्वहाणके को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने सरकार पर जमकर निशाना साधा। इंटरव्यू में किसान नेता ने सरकार पर देश की संपत्ति बेचने का भी आरोप लगाया, हालांकि उनकी इस बात पर एंकर ने उन्हें बीच में ही टोक दिया और कहा कि कुछ बिकता तो आपसे पहले मैं खड़ा होता।

इंटरव्यू में न्यूज एंकर ने राकेश टिकैत से सवाल किया कि विरोध सिर्फ अडानी और अंबानी का ही क्यों कर रहे हैं? उनकी बात का जवाब देते हुए किसान नेता ने कहा, “अडानी और अंबानी का नहीं है, हमारा मुद्दा यह है कि किसान मजबूत कैसे होगा। किसान जब मजबूत होगा, जब उसकी फसलें ठीक तरीके से बिकेंगी। उसके दूध का रेट ठीक होगा तब होगा।”

न्यूज एंकर के सवाल का जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने आगे कहा, “ये नहीं है कि आप बाहर की कंपनी बुलाकर दूध के किसान को आप बर्बाद करोगे। दूध में अगर कोई मिलावट कर रहा है तो उसे पकड़ो, उसपर कार्रवाई करो। दूध और फल दोनों ही एक बच्चे का अधिकार है, लेकिन यहां खराबी बहुत होती है।”

राकेश टिकैत ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “ये घोषणापत्र में कुछ डालते हैं और काम कुछ और करते हैं। इन्होंने घोषणा पत्र में कहां कहा था कि हम रेलवे बेचेंगे।” उनकी बात पर न्यूज एंकर ने टोकते हुए पूछा, “कौन सी ट्रेन बेच दी, आप एक नाम बताइये। किसी को रेलवे स्टेशन कुछ सालों तक चलाने के लिए देना, बेचना नहीं होता।”

न्यूज एंकर की बात पर किसान नेता ने सवाल किया, “लाल किला का क्या हुआ?” इसपर न्यूज एंकर ने कहा, “वो बेचा थोड़ी है। अगर इस सरकार ने कोई संपत्ति बेची होती तो आपसे पहले मैं खड़ा होता। इसे बेचना नहीं मोनेटाइजेशन कहते हैं।” इससे इतर राकेश टिकैत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा साल 2007 में लिए गए फैसले को याद करते हुए सरकार पर निशाना साधा और कहा, “सरकार को चाहिए की चमकीली कोठी में बैठकर योजनाएं नहीं बनाई जाती हैं, इसके लिए ग्राउंड रिपोर्ट की भी जरूरत होती है।”