अगर मुझे निर्णय नहीं लेने दोगे तो ईंट से ईंट बजा दूंगा, सिद्धू ने फिर कैप्टन पर किया सीधा वार

पिछले काफी समय से पंजाब कांग्रेस के अंदर उपजा विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का कमान दिए जाने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पाटी के अंदर उपजा असंतोष ख़त्म हो जाएगा।

पंजाब कांग्रेस में उपजा कलह थमने का नाम नहीं ले रहा है। कश्मीर को लेकर विवादित बयान देने वाले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मालविंदर सिंह माली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मालविंदर सिंह माली के इस्तीफे के बाद नवजोत सिंह सिद्धू का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर सीधा वार करते हुए कहा है कि अगर मुझे निर्णय नहीं लेने दोगे तो ईंट से ईंट बजा दूंगा।

शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कहा है कि अगर मैं पंजाब के लोगों की आशा और उम्मीद पर खरा उतर गया तो अगले 20 साल तक कांग्रेस को बाहर नहीं जाने दूंगा। लेकिन मुझे निर्णय नहीं लेने दिया गया तो मैं ईंट से ईंट बजा दूंगा। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि सभी संसाधन निजी जेबों में जा रहे हैं। पंजाब मॉडल यह नहीं है कि राज्य का खजाना खाली रहे, बल्कि इस खजाने को कैसे भरना है, यह पंजाब मॉडल कहता है।

बता दें कि पिछले दिनों नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मालविंदर सिंह माली ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा था कि कश्मीर एक अलग देश हुआ करता था। भारत और पाकिस्तान दोनों ने उसपर अवैध कब्जा किया था। इस बयान के बाद से ही वे कांग्रेस, भाजपा सहित कई राजनीतिक दलों के निशाने पर थे। इसके अलावा उन्होंने इंदिरा गांधी का एक विवादित स्केच भी शेयर किया था। इतना ही नहीं उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके सहयोगियों को अलीबाबा और चालीस चोर भी कह दिया था।

जिसके बाद से ही उनके इस्तीफे की मांग हो रही थी। आख़िरकार शुक्रवार को मालविंदर सिंह माली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में भी उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित कई नेताओं से अपने जान का खतरा बताया और इसके लिए कई नेताओं को जिम्मेवार भी ठहराया। 

पिछले काफी समय से पंजाब कांग्रेस के अंदर उपजा विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का कमान दिए जाने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पाटी के अंदर उपजा असंतोष ख़त्म हो जाएगा। लेकिन बीते गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के सहयोगी के घर पर आयोजित डिनर में  करीब 58 विधायकों और आठ सांसदों के मौजूद रहने के बाद से एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है।