अच्छा काम करना क्या गुनाह? तमिलनाडु की दो लोकसभा सीटें कम करने पर बिफरा मद्रास HC, बोला- मिलने चाहिए 56 सौ करोड़

कोर्ट का कहना था कि 1999 में वाजपेयी सरकार महज 1 वोट से गिर गई थी। जब एक सांसद सरकार को गिराने का काम कर सकता है तो तमिलनाडु को 2 सांसदों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। बावजूद इसके कि उसने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को सफलता से क्रियान्वित किया है।

MADRAS HC, LOKSABHA SEATS, TAMILNADU, UP-BIHAR SEATS LOKSABHA तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने जनसंख्या को नियंत्रित किया हुआ है, लेकिन उसके बाद भी उत्तर प्रदेश, बिहार राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों की संसद में सीटें अधिक क्यों हैं? कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु को इसका मुआवजा मिलना चाहिए। ये रकम 5,600 करोड़ रुपए तक हो सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि 1962 तक लोकसभा में तमिलनाडु के 41 सदस्य थे। इसके बाद जनसंख्या में कमी के कारण तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की संख्या घटकर 39 हो गई। कोर्ट का कहना था कि लोकतंत्र में हर वोट के मायने हैं। हाईकोर्ट ने 1999 में अटल बिहार वाजपेयी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए ये आदेश जारी किया।

कोर्ट का कहना था कि 1999 में वाजपेयी सरकार महज 1 वोट से गिर गई थी। जब एक सांसद सरकार को गिराने का काम कर सकता है तो तमिलनाडु को 2 सांसदों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। बावजूद इसके कि उसने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को सफलता से क्रियान्वित किया है। कोर्ट ने कहा कि भारत में जनसंख्या को नियंत्रित करना जरूरी है। अभी देश की आबादी तकरीबन 138 करोड़ है। अगर विस्फोट को न रोका गया तो 2050 तक भारत चीन से आगे निकल जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु कोटे से राज्यसभा में सीटों को बढ़ाया जाना चाहिए था। इससे सूबे के जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम पर भी मुहर लगेगी। कोर्ट ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व तय करने का आधार नहीं हो सकते। ये कहां की तुक है कि कोई सूबा केंद्र की अच्छी स्कीमों पर बेहतरीन काम करे और उसे सजा मिले।

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस केएन किरुबाकरन, जस्टिस बी पुग्लेन्धी की बेंच ने 17 अगस्त को कहा था कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को लागू करने में असफल रहे, उन्हें संसद में अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला। जबकि दक्षिणी राज्य खासकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को कम प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। कोर्ट ने पूछा कि क्या केंद्र तमिलनाडु में सीटों की संख्या बढ़ाकर फिर से 41 करेगा?

गौरतलब है कि लोकसभा में कुल 542 सीट हैं। बहुमत का आंकड़ा 272 का है। सबसे ज्यादा सीटें यूपी में हैं। यहां से 80 सांसद लोकसभा जाते हैं। महाराष्ट्र से 48, बिहार से 40 सांसद चुने जाते हैं। जबकि तमिलनाडु में ये तादाद 39 रहै जबकि आंध्रप्रदेश में 25 है। मध्य प्रदेश से 29 सांसद लोकसभा के लिए चुने जाते हैं।