अजीज प्रेमजी विवि का दावा- कोरोना से अर्थव्यवस्था चौपट, 23 करोड़ लोगों के लिए 375 रुपये की दिहाड़ी कमानी हुई मुश्किल

देश के 23 करोड़ लोगों की दिहाड़ी प्रभावित होने पर देश की अर्थव्यवस्था में काफी नुकसान होने की संभावना है। कम आमदनी के कारण लोगों के खर्च प्रभावित होने पर विकास दर भी प्रभावित होगी।

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मजदूर पिछले लॉकडाउन से अभी उबरा भी नहीं था कि वह फिर लॉकडाउन में फंसा है। मजदूरो की मंडियां फिर सूनी हो गई हैं। वैसे भी पिछले लॉकडाउन के खुलने के बाद भी कॉन्स्ट्रक्शन वर्क में तेजी नहीं आ पाई थी। अब अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने दावा किया है कि करीब 23 करोड़ लोगों के लिए पौने तीन सौ की दिहाड़ी भी मुश्किल हो गई है। 

देश के 23 करोड़ लोगों की दिहाड़ी प्रभावित होने पर देश की अर्थव्यवस्था में काफी नुकसान होने की संभावना है। कम आमदनी के कारण लोगों के खर्च प्रभावित होने पर विकास दर भी प्रभावित होगी। हालांकि ऑक्सफैम ने कहा है कि शायद इसके बाद भी भारत सबसे तेज विकसित हो रही अर्थव्यव्सथाओं में शुमार कर लिया जाए। लेकिन यह ऐसा देश होगा जो सर्वाधिक असामान होंगे।

हालांकि कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो भविष्य को लेकर आशान्वित हैं। ब्लैकस्टोन ग्रुप इन्क. कंपनी के चेयरमैन स्टीफन श्वार्जमन का मानना है कि वे आगे अच्छा भविष्य देख रहे हैं। ब्लैकस्टोन ग्रुप ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया हुआ है। इस कंपनी के कई बड़े ऑफिस टावर्स हैं। श्वार्जमन ने कहा है कि आगामी दस साल में हम भारत में पहले से ज्यादा निवेश करेंगे।

वैसे रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव को भविष्य इतना चमकदार नहीं दिख रहा है। डी सुब्बाराव का मानना है कि इनफॉर्मल सेक्टर के वर्करों यानी सड़क के मजदूरों पर पड़ने वाले दुख भारत की दीर्घकालिक प्रगति को नुकसान पहुंचा सकता है। देश में असमानताएं और तीखी हो गई हैं। फॉर्मल सेक्टर तो सामान्य हालत में लौट आया है लेकिन इनफॉर्मल सेक्टर आज भी कष्ट में है।

धीमी विकास दर का असर मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में 20 से 30 हजार की नौकरी करने वाले मजदूर पर पड़ेगा। इन हालात में जबकि दूसरी लहर कहर बरपाए है, और तीसरी लहर का खौफ पहले से घर कर गया है, यह कह पाना बड़ा मुश्किल है कि देश की अर्थव्यवस्था को कोरोना कितना नुकसान पहुंचाएगा।