अनिल अंबानी की इस कंपनी पर 11 हजार करोड़ रुपए का कर्ज, खरीदने के लिए तीन कंपनियों ने लगाई फाइनल बोली

Anil Ambani: कर्ज के कारण अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इस दौरान कई कंपनियों की बिक्री हो चुकी है, जबकि कई की बिक्री प्रक्रिया जारी है। रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड पर 11 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसको खरीदने के लिए तीन कंपनियों ने फाइनल बोली जमा की है।

Anil Ambani, Anil Dhirubhai Ambani Group अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी।

अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की अधिकांश कंपनियां कर्ज में डूबी हैं। इनमें से कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया के दौरान बिक चुकी हैं। अब रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड को खरीदने के लिए तीन कंपनियों ने फाइनल बोली लगाई है। रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग पर करीब 11 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।

बैंकिंग सूत्रों के हवाले से एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस नेवल के लिए तीन कंपनियों ने फाइनल बोली लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक आखिरी सप्ताह में फाइनल बोली जमा करने वालों में एपीएम टर्मिनल और नवीन जिंदल ग्रुप शामिल हैं। इसके अलावा जीएमएस, दुबई और टर्की के बेसिकटास शिपयार्ड के कंसोर्टियम ने भी बोली जमा की है। इन तीनों बोलियों के मूल्यांकन को लेकर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (COC) इसी सप्ताह बैठक करेगी।

12 कंपनियों ने जमा की थी EOI: रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड को खरीदने के लिए कुल 12 कंपनियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जमा की थी। लेकिन इसमें से केवल तीन कंपनियों ने ही फाइनल बोली जमा की है। कंपनी पर कुल 11 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। रिलायंस नेवल का पूरा कर्ज नेशनल असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) को ट्रांसफर किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि अब रिलायंस नेवल के कर्ज की समाधान प्रक्रिया NARCL के जरिए होगी। आईडीबीआई बैंक रिलायंस नेवल का लीड बैंकर है।

इन कंपनियों ने जमा की थी EOI: रिलायंस नेवल को खरीदने के लिए जिन 12 कंपनियों ने EOI जमा की थी उसमें एपीएम टर्मिनल्स, यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन (रूस), हेजल मर्केंटाइल लिमिटेड, चौगुले ग्रुप, इंटरप्स (अमेरिका), नेक्स्ट ऑर्बिट वेंचर्स, ARCIL, IARC, JM ARC, CFM ARC, इन्वेंट ARC और फॉनिक्स ARC शामिल थे। EOI की प्रक्रिया में रूस की यूनाइटेड शिपबिल्डिंग्स रिलायंस नेवल को खरीदने की बड़ी दावेदार थी, लेकिन इसने फाइनल बोली से दूरी बना ली। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी प्रबंधन का मानना है कि रिलायंस नेवल के नए डिफेंस नेवल कारोबार को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

2015 में बदला था कंपनी का नाम: रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सब्सिडियरी है। पहले इसका नाम रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड था। 2015 में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने पिपावाव डिफेंस एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग लिमिटेड को खरीदा था। बाद में इसका नाम बदलकर रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड कर दिया था।

इंडियन नेवी ने रद्द किया 2500 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट: पिछले साल अक्टूबर में इंडियन नेवी ने रिलायंस नेवल का 2500 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था। यह कॉन्ट्रैक्ट ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स से जुड़ा था। डिलिवरी में देरी के कारण इंडियन नेवी ने यह कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया था। रिलायंस नेवल को 2011 में इंडियन नेवी की तरफ से 5 वॉरशिप तैयार करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था।