अफगानिस्तान में अमेरिका ने हवाई हमला किया, पर ब्लैक हॉक्स को क्यों छोड़ दिया? ब्रह्मा चेलानी ने समझाया

चेलानी ने ये बातें ऐसे वक्त पर कहीं, जब दिन में अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएसआईएस-के ‘साजिशकर्ता’ पर हमला करने का दावा किया। यूएस ने काबुल हवाईअड्डे पर आत्मघाती धमाकों के 48 घंटे से भी कम समय में यह जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है।

afghanistan, taliban, india news अफगानिस्तान के काबुल में एयरपोर्ट पर हुए धमाकों के बाद वहां बाहर खड़े तालिबानी लड़ाके। (फाइल फोटोः एपी/पीटीआई)

अफगानिस्तान में काबुल धमाकों के मास्टरमाइंड को ढेर करने से जुड़े अमेरिका के दावे पर रणनीति संबंधी विचारक, लेखक और टिप्पणीकार ब्रह्मा चेलानी ने कहा है कि अमेरिका ने एयरस्ट्राइक कर चरमपंथी को तो मार गिराया, पर वहां के हवाई अड्डे पर पार्क किए गए ब्लैक हॉक चॉपर्स पर अटैक का कोई प्रयास नहीं किया। उल्टा यूएस ने ही तालिबान को आधुनिक वेपन सिस्टम (हथियार प्रणालियां) उपहार स्वरूप दी हैं।

ये बातें शनिवार (28 अगस्त, 2021) को उन्होंने दो ट्वीट्स के जरिए कहीं। उन्होंने लिखा, “नंगरहार में अमेरिका द्वारा की गई एक स्ट्राइक (हमले) में कथित आईएसआईएस-के चरमपंथी को मार गिराया गया, मगर कुछ अफगान हवाई अड्डों पर खुले में पार्क किए गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर हमला करने का कोई प्रयास न किया गया। अमेरिका ने तालिबान को अत्यधिक आधुनिक हथियार प्रणालियां तोहफे में दी हैं, जिनमें से कुछ ने पाकिस्तान की ओर अपना रास्ता खोज लिया है।”

अगले ट्वीट में उन्होंने कहा, “वास्तव में, अमेरिका परोक्ष रूप से पाकिस्तान को हथियार दे रहा है, जो अपने कट्टर विरोधी भारत के खिलाफ ऐसे हथियारों को तैनात करेगा। अमेरिकी हथियार निर्माता तब पाकिस्तान के नए अधिग्रहण का मुकाबला करने के लिए भारत को हथियार बेचने की कोशिश करेंगे। भारत का यूएस-हथियार आयात पहले से ही पाकिस्तान को अमेरिकी उपहारों को ‘अंडरराइट’ करने में मदद करता है।

चेलानी ने ये बातें ऐसे वक्त पर कहीं, जब दिन में अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएसआईएस-के ‘साजिशकर्ता’ पर हमला करने का दावा किया। यूएस ने काबुल हवाईअड्डे पर आत्मघाती धमाकों के 48 घंटे से भी कम समय में यह जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है। अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रवक्ता कैप्टन बिल अर्बन ने बताया, ‘‘अमेरिकी सेना ने इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएसके) साजिशकर्ता के खिलाफ आज आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया। यह मानवरहित हवाई हमला अफगानिस्तान के नांगहर प्रांत में हुआ। शुरुआती संकेत मिले हैं कि हमने लक्षित व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया। हमारे पास किसी भी असैन्य व्यक्ति के न मारे जाने की जानकारी है।’’

इससे पहले, व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन काबुल हवाईअड्डे पर हमला करने वाले आतंकवादियों को जिंदा नहीं छोड़ना चाहते। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने अपने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उन्होंने कल यह स्पष्ट कर दिया वह उन्हें धरती पर जिंदा नहीं छोड़ना चाहते।’’ बता दें कि काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले में 169 अफगान और 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी।

‘किसी भी स्थाई हल में PAK शामिल हो’: अफगानिस्तान में किसी भी स्थायी समाधान में पाकिस्तान निश्चित तौर पर शामिल होना चाहिए। यह बात एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसद ने कही। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की ओर साफ तौर पर इशारा करते हुए कहा, “हम सबको याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान परमाणु सशस्त्र राष्ट्र है और तालिबान का एक पाकिस्तानी संस्करण भी है जो पाकिस्तानी सरकार और सेना को गिराना चाहता है।” उन्होंने कहा कि इसलिए, “अफगानिस्तान में किसी भी सतत समाधान में पाकिस्तान शामिल होना चाहिए।’’ साथ ही कहा कि ये “बहुत खतरनाक वक्त” है।

US हमलों के खतरे के बावजूद 31 अगस्त की समयसीमा पर अडिगः अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसआईएस-के) के खतरे के कारण अफगानिस्तान से लोगों को निकालने की प्रक्रिया के ‘‘पीछे खिसक जाने’’ के बावजूद कहा कि वह लोगों की निकासी का अपना अभियान 31 अगस्त तक ही पूरा करेगा। अमेरिका और तालिबान ने युद्धग्रस्त देश से अमेरिकी सैनिकों की निकासी के लिए 31 अगस्त की समयसीमा तय की है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने शुक्रवार को अपने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘खतरा अभी बना हुआ है। हमारे सैनिक अब भी खतरे में हैं। यह अभियान का सबसे खतरनाक हिस्सा है।’’