अफगानिस्तान संकटः जितना जीवन में न रोया, उतना इस ‘त्रासदी’ ने रुलाने पर किया मजबूर- अफगानी छात्र ने सुनाया टूटे दिल का हाल

पीएचडी के छात्र जाकिर का कहना था कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी जिस तरह से देश छोड़कर चले गए उसका काफी दर्द है।

Afghanistan, Afghanistan Crisis, Afghan student narrated, Condition of a broken heart काबुल की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन करते तालिबान के लड़ाके। (फोटोः @nypost)

बीस साल की लंबी लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से निकलने के कुछ ही दिनों के भीतर लगभग पूरे देश पर फिर से तालिबान का कब्जा हो गया है। वहां रह रहे लोगों का हाल बेहाल है, लेकिन जो अपने वतन से दूर रहकर भविष्य संवारने में जुटे थे, उन पर भी मानो पहाड़ टूट पड़ा है। भारत में रह रहे दो छात्रों से जब इस संकट के बारे में सवाल किया गया तो उनकी आंखें छलक उठीं।

पीएचडी के छात्र जाकिर का कहना था कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से हालात बेकाबू हो गए हैं। लोग दूसरे देशों में शरण लेने के लिए भाग रहे हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी जिस तरह से देश छोड़कर चले गए उसका काफी दर्द है। भारत आए अफगान छात्र ने कहा कि राष्ट्रपति हमें ऐसे समय में छोड़कर भाग गए। यह बहुत गैर-जिम्मेदाराना है। गनी के चले जाने से लोग काफी नाराज हैं।

एक अन्य छात्र का कहना है कि उसका भविष्य धुंधला हो गया है। परिवार काबुल में रहता है लेकिन अगले दिन क्या हाल होगा इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। उसका भी कहना है कि गनी हमें ऐसे समय में छोड़कर चले गए, यह बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। इससे हर अफगान का दिल दुखा है, हमें उनसे बहुत उम्मीदें थीं। छात्र का कहना है कि पिछले बीस सालों में जो विकास हुआ वो धरा का धरा रह गया।

एक अन्य छात्र जो 2013 से भारत में रह रहा है, उसका कहना है कि उसका अपने परिवार से संपर्क टूट गया है। उसे नहीं पता कि उनका क्या हश्र हुआ। इतना कहते ही वह फफक पड़ता है। वह भी गली को दोष देता है। अफगानिस्तान छोड़ने पर गनी ने कहा है कि वे इसलिए देश छोड़कर चले गए क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि और खून-खराबा हो। लेकिन छात्र का कहना है कि हम सभी उनके भरोसे थे। उन्हें इस तरह नहीं भागना था।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर तालिबान लड़ाकों का कब्जा हो गया है। तालिबान लड़ाकों का एक बड़ा समूह राजधानी काबुल में स्थित राष्ट्रपति भवन के भीतर नजर आ रहा है। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर अपने कब्जे की घोषणा राष्ट्रपति भवन से करने और देश को फिर से ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ का नाम देने की उम्मीद है।