अब्दुल हमीद और कलाम मेरे हीरो, जयचंद नहीं- बोले गीतकार मनोज मुंतशिर, वीडियो पर हुआ था विवाद

मनोज मुंतशिर हाल ही में टाइम्स नाउ के शो में नजर आए, जहां उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद और अशफाक उल्ला खान को हीरो बताया।

Lyricist Manoj Muntashir, Akbar, Humayun, Jahangir, गीतकार मनोज मुंतशिर (फोटो सोर्स- मनोज ऑफीशियल इंस्टाग्राम)

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार अपने एक वीडियो को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। दरअसल, अपने वीडियो में मनोज मुंतशिर ने बाबर, हुमायूं, अकबर और जहांगीर को डकैत बताया था। उनकी इस बात को लेकर जहां एक वर्ग ने उनका विरोध किया तो वहीं एक वर्ग ने उनकी बात से सहमति भी जाहिर की थी। वहीं हाल ही में मनोज मुंतशिर टाइम्स नाउ के शो ‘सवाल पब्लिक का’ में भी हाजिर हुए, जहां उन्होंने कहा कि जाति या धर्म से कोई हीरो नहीं होता है। हीरो हीरो होता है। अपने बयानों में उन्होंने भारतीय मुसलमानों पर भी चर्चा की।

मनोज मुंतशिर ने डिबेट शो में इस बारे में बात करते हुए कहा, “जाति से कोई हीरो नहीं बनता है, हीरो हीरो होता है। अशफाक उल्ला खान मेरे हीरो हैं, एपीजे अब्दुल कलाम मेरे हीरो हैं। अब्दुल हमीद मेरे हीरो हैं। क्या मैं उन्हें इसलिए हीरो न मानूं, क्योंकि मैं हिंदू हूं? इतना छोटा तो हम नहीं सोचते हैं। रावण मेरा हीरो नहीं है, रावण हिंदू था और ब्राह्मण भी था।”

मनोज मुंतशिर ने इस बारे में बात करते हुए आगे कहा, “राणव सीधे ब्रह्मा की ब्लडलाइन में आता है और मैं भी ब्राह्मण ही हूं। लेकिन वह मेरा हीरो नहीं है। मैं जिंदगी भर राणव का पुतला जलाउंगा। जयचंद भी मेरा हीरो नहीं है, वह क्षत्रिय था। आपको इस देश में रहना है, यह देश आपका है। पहली बात तो यह है कि मैं इस बात की बहुत इज्जत करता हूं कि जब इस देश का बंटवारा हुआ, उस वक्त यहां के मुलसमानों ने दूसरा मुल्क नहीं चुना और यहां रह गए।”

मनोज मुंतशिर ने इस बारे में बात करते हुए आगे कहा, “मैं आपके चैनल के जरिए बताना चाहता हूं कि अभी भी कई नारे चलते हैं कि ‘मुसलमान के दोस्त हम, कब्रिस्तान या पाकिस्तान’, इन नारों पर मुझे ऐतराज है। मुसलमान की जगह यहां है हिंदुस्तान में, यहां रहेगा, भाई बनकर रहेगा। लेकिन भाई बनकर रहेगा। वह भाई बनाने वाली बात कब समझ में आएगी।”

मनोज मुंतशिर यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा, “भाई कब बनेगा, जब हम साथ मिलकर एक छत के नीचे रहेंगे, खाना खाएंगे। बाबर और अकबर की तरफ फेंके गए पत्थर अगर कोई मुसलमान भाई अपने सिर पर लेता है तो यह मेरी गलती नहीं है, क्योंकि यह मैंने बाबर की ओर नहीं फेंके थे।”