अमेरिकी रिपोर्ट पर बोले सऊदी के पत्रकार- संप्रभुता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर पत्रकार की हत्या का आरोप है.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर पत्रकार की हत्या का आरोप है.

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सऊदी विदेश मंत्रालय ने में कहा कि सऊदी अरब की सरकार देश के नेतृत्व से संबंधित रिपोर्ट में उल्लेखित नकारात्मक, झूठे और अस्वीकार्य आकलन को खारिज करते हैं और रिपोर्ट में गलत जानकारी और निष्कर्ष हैं.

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रियाद. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Saudi Crown Prince Mohammed bin Salman)द्वारा इस्तांबुल में पत्रकार जमाल खशोगी (jamal khashoggi) को ‘पकड़ने या मारने’ के एक अभियान को मंजूरी देने के कथित दावे की रिपोर्ट अमेरिकी संसद में पेश होने के बाद सऊदी अरब की मीडिया ने कहा है कि रणनीतिक सहयोगियों को अमेरिका धमकी ना दे. सऊदी अरब के कालम्निस्ट ने कहा है कि उनके देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

खालेद अल-मलिक ने स्थानीय अल जज़ीरा अख़बार में लिखा है- अमेरिका के पास कोई अधिकार नहीं है कि वह रणनीतिक सहयोगी को धमकी दे. घरेलू मतभेदों के चलते क्षेत्रीय हितों और अपने साझेदारों को नुकसान पहुंचाना अमेरिका के हित में नहीं है.’

‘सऊदी, वाशिंगटन का सबसे पुराना अरब सहयोगी’
मलिक ने कहा कि खाड़ी युद्ध और साल 2019 में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले के बाद भी अब तक अपने रक्षा मामलों में अमेरिका पर निर्भर सऊदी हथियारों के लिए चीन और रूस का रूस का रुख कर सकता है. ईरान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘लेकिन उनके ऐतिहासिक और सामरिक संबंधों और समान लक्ष्यों के कारण सऊदी अमेरिका को पसंद करता है.’
लंदन के अशरक अल-अस्वत अखबार में  अब्दुल्ला अल-ओताबी ने लिखा है कि  सऊदी, वाशिंगटन का सबसे पुराना अरब सहयोगी है. यह धमकियों से हिल जाने वाला बनाना रिपब्लिक नहीं है.’ फहीम अल-हामिद ने ओकाज अखबार में लिखा, ‘हम (अमेरिका के साथ) संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं लेकिन अपनी संप्रभुता की कीमत पर नहीं. हमारी न्यायपालिका और हमारे फैसले इसकी सीमा हैं.’ सऊदी अरब के सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण ने रविवार को एक बयान जारी कर अमेरिकी रिपोर्ट को ‘गलत और अस्वीकार्य’ बताया.

रिपोर्ट शनिवार को बाइडन प्रशासन ने जारी की
बता दें सऊदी अरब के असंतुष्ट पत्रकार की बर्बर हत्या से संबंधित रिपोर्ट शनिवार को बाइडन प्रशासन ने जारी की है. खशोगी की दो अक्टूबर 2018 को तुर्की के इस्तांबुल शहर में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में मोहम्मद बिन सलमान से संबंधित लोगों ने हत्या कर दी गई थी. वह अमेरिका के वैध स्थायी निवासी थे और ‘वाशिंगटन पोस्ट’ अखबार में लेख लिखते थे और शहजादे की नीतिओं के कटु आलोचक थे. उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे और उनके अवशेष कभी नहीं मिले. सऊदी अरब को आखिरकार मानना पड़ा कि खशोगी की हत्या गलती से हुई थी और हालांकि हत्याकांड में शहजादे की संलिप्तता से इनकार किया था.

राष्ट्रीय खुफिया निदेशालय कार्यालय (ओडीएनआई) ने कांग्रेस (संसद) को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि मोहम्मद बिन सलमान ने शायद ऐसा माहौल बनाया जिसमें उनके सहयोगियों में इस बात का डर पैदा हुआ कि सौंपा गया काम पूरा नहीं करने पर उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है या उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया कि इस बात की संभावना नहीं है कि उनके सहयोगी शहजादे के आदेश पर सवाल कर सकते थे या फिर संवेदनशील अभियान बिना उनकी मंजूरी के चला सकते थे. यह रिपोर्ट 11 फरवरी की है और रिपोर्ट के एक हिस्से को गोपनीयता के दायरे से बाहर किया गया है जिसे शुक्रवार को कांग्रेस को सौंपा गया है. (भाषा इनपुट के साथ)