अरुणाचल प्रदेश पर चीन की नज़र! भारत ने LAC से सटे तीन ज़िलों को ‘तनावग्रस्त क्षेत्र’ घोषित किया

कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद आफस्पा के तहत यह एक्शन लिया गया है। आफस्पा उन इलाकों में लागू किया जाता है, जहां पर प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों की जरूरत होती है।

LAC, Indo- Chinas Border, Arunachal Pradesh, AFSPA, Modi Government एलएसी पर गश्त करते केंद्रीय बलों के जवान। (फोटोः ट्विटर@CISFHQrs)

केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों और एक अन्य जिले के दो थाना क्षेत्रों को अगले छह महीने के लिए अशांत घोषित किया है। कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफस्पा) के तहत यह एक्शन लिया गया है। आफस्पा उन इलाकों में लागू किया जाता है, जहां पर प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों की जरूरत होती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना एक अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक प्रभावी होगी। पहली बार दो अन्य जिलों- लोअर दिबांग और लोहित के दो पुलिस थाना क्षेत्रों में आफस्पा कानून लागू नहीं होगा। सुरक्षा हालात में सुधार के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। केंद्र ने आफस्पा के तहत एक अप्रैल 2021 को अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लॉन्गडिंग जिलों और चार पुलिस थाना क्षेत्रों को अशांत इलाका घोषित किया था। ये असम की सीमा से सटे इलाके हैं।

मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लॉन्गडिंग जिलों और असम की सीमा से लगते चार थाना क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की हाल में समीक्षा की थी। केंद्र के आदेश के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लॉन्गडिंग जिलों और नामसई जिले के नामसई और महादेवपुर पुलिस थाना क्षेत्र को तनावग्रत क्षेत्र घोषित किया गया है। केंद्र का कहना है कि अरुणाचल में एनएससीएन, उल्फा और एनडीएफबी जैसे उग्रवादी संगठनों की मौजूदगी है। इसी वजह से एहतियातन यह कदम उठाना पड़ा है।

सूत्रों का कहना है कि चीन की नजर लंबे समय से एलएसी के साथ लगते भारतीय इलाकों पर है। अरुणाचल प्रदेश में चीन लगातार घुसपैठ की कोशिश में है। गृह मंत्रालय का यह कदम चीनी खतरे के मद्देनजर भी देखा जा रहा है। मोदी सरकार ये नहीं चाहती कि चीन को सीमावर्ती इलाकों में किसी तरह का मौका दिया जाए। इसके लिए जरूरी है कि वहां की सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रखी जाए। यह कदम इसके तहत उठाया गया है।

गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले साल मई में पैंगोंग क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद से सीमा पर गतिरोध चला आ रहा है। इस घटना के बाद दोनों देशों ने सीमाओं पर हजारों अतिरिक्त सैनिक और भारी अस्त्र-शस्त्र तैनात कर दिए थे। एलएसी पर संवेदनशील क्षेत्र में दोनों देशों ने सैनिक तैनात कर रखे हैं। केवल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से दोनों देशों ने फरवरी में अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया था।