अवैध निर्माण के आरोप लगने के बाद सीएम उद्धव के पीए ने खुद का बंगला किया ध्वस्त

नारवेकर ने कथित तौर पर दापोली के मुरुद में 2,000 वर्ग फुट का समुद्र के सामने बंगला बनाया था।

maharashtra, shivsena बंगले को ध्वस्त किए जाने की तस्वीर। (स्क्रीनशॉट)।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पर्सनल असिस्टेंट मिलिंद नारवेकर ने भाजपा द्वारा लगाए गए अवैध निर्माण और कोस्टल रेगुलेशन जोन नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बाद, मुरुड, रत्नागिरी जिले में अपने खुद के बंगले को ध्वस्त कर दिया। शिवसेना के सूत्रों ने कहा कि नारवेकर ने अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की आशंका में अपने घर को ध्वस्त कर दिया।

नारवेकर ने कथित तौर पर दापोली के मुरुद में 2,000 वर्ग फुट का समुद्र के सामने का बंगला बनाया था। नारवेकर के खुद से अपने बंगले को गिराने के कदम को किसी भी तरह की शर्मिंदगी से बचने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले जून में, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने केंद्र और राज्य के पर्यावरण विभागों में शिकायत दर्ज कराई थी कि नारवेकर, शिवसेना मंत्री अनिल परब और कुछ अन्य लोगों द्वारा क्षेत्र में किए गए निर्माण अवैध थे। इसके बाद, केंद्र और राज्य के अधिकारियों की एक टीम ने साइट का दौरा किया था।

रविवार को सोमैया ने इसका श्रेय लेते हुए नारवेकर के बंगले को तोड़े जाने का वीडियो पोस्ट किया, “हमने यह कर दिया। मैं आज घटना स्थल पर विध्वंस देखने जाऊंगा और नारवेकर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करूंगा।’

सोमैया ने कहा कि नारवेकर ने खुद यहां से 215 किलोमीटर की दूरी पर दापोली तालुका के मुरुद में स्थित बंगले को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन प्रशासन को अभी भी पर्यावरण अधिनियम, तटीय क्षेत्र विनियमन (सीआरजेड), महाराष्ट्र क्षेत्रीय व नगर नियोजन अधिनियम के साथ-साथ आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज करके कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व लोकसभा सदस्य ने दावा किया कि उन्होंने 25 जून को “अवैध निर्माण” का पर्दाफाश किया था और 26 जून को रत्नागिरी कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने कहा, “मैंने मामले में कार्रवाई की मांग के लिए 30 जून को केंद्रीय पर्यावरण सचिव से मुलाकात की थी। पांच जुलाई को बंगले का दौरा करने वाली केन्द्रीय टीम ने राज्य पर्यावरण विभाग को बताया कि बंगला अवैध था। टीम ने विभाग को कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बाद नारवेकर को बंगला ध्वस्त करने पर मजबूर होना पड़ा था।”