अश्विनमय है भारत का स्पिन आक्रमण

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार जीत से भारतीय टीम ने टैस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए राह आसान कर ली।

Ashwin

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार जीत से भारतीय टीम ने टैस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए राह आसान कर ली। इस मुकाबले में दो खिलाड़ियों का दबदबा रहा। पहले हैं अक्षर पटेल जिन्होंने घरेलू मैदान पर 11 इंग्लिश बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। दूसरे हैं रविचंद्रन अश्विन जिनके नाम दूसरे सबसे तेज 400 विकेट लेने का रेकॉर्ड बना। उन्होंने श्रीलंका के पूर्व स्पिनर मुथैया मुरलीधरण का रेकॉर्ड तोड़ा। भारतीय गेंदबाज को जहां यह उपलब्धि 77वें मैच में मिली वहीं श्रीलंकाई खिलाड़ी ने 72 मैचों में 400 विकेट के आंकड़े को पार कर लिया था।

अश्विन के इस कारनामे के बाद भारतीय क्रिकेट जगत के महान स्पिनरों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। खेल विशेषज्ञों की राय में यह खिलाड़ी जल्द ही अनिल कुंबले के 619 विकेट के रेकॉर्ड को तोड़ने की राह पर है। साथ ही यह भी कहा गया कि अगले कुछ मैचों में ही वे हरभजन के 417 विकेट के आंकड़े को पार कर जाएंगे। यह आकलन कुछ हद तक सही भी है।

अश्विन ने जिस तेजी से बल्लेबाजों की गिल्लियां बिखेरी हैं, उनके लिए किसी भी रेकॉर्ड को तोड़ना मुश्किल नहीं है। वर्तमान स्पिनरों की बात करें तो उन्हें टक्कर देने वालों में सिर्फ आस्ट्रेलियाई फिरकी गेंदबाज नाथन लियोन का नाम आता है। उनके नाम 399 विकेट हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने 100 टैस्ट खेले हैं।

इस लिहाज से 400 विकेट के आंकड़े को भले ही वो पार कर लें लेकिन तेजी से बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने में अश्विन जितने माहिर साबित नहीं होंगे। भारत के महानतम स्पिनरों में शामिल अनिल कुंबले ने भी इस आंकड़े को पार करने के लिए 85 टैस्ट का इंतजार किया था। इस लेख में आंकड़ों के माध्यम से चर्चा करेंगे कि क्या अश्विन भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनरों के मुकाबले बेहतर हैं?

घरेलू मैदान पर बादशाहत का आरोप

भारत टीम के बल्लेबाज हों या गेंदबाज, अकसर उन पर घरेलू मैदान पर बादशाहत और विदेशी पिच पर फिसड्डी होने का आरोप लगता है। अश्विन या अक्षर ने मोटेरा की पिच पर फिरकी से इंग्लिश गेंदबाजों को बांध दिया, तब भी यह आरोप लगे। कहा गया कि मेजबान ने फायदे के लिए टर्निंग यानी स्पिन गेंदबाजों की मददगार पिच तैयार की है। हालांकि यह आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं।

भारतीय गेंदबाजों ने विदेशी पिच पर भी अपने हुनर के जलवे दिखाए हैं। अश्विन के 401 विकेटों में से 278 घरेलू मैदान पर लिए गए। वहीं 123 विकेट उन्होंने विदेशी पिच पर ही लिए हैं। भारत में जहां उनका औसत 22.19 का है वहीं श्रीलंका में छह टैस्ट मैचों में उन्होंने 21.57 के औसत से 38 विकेट हासिल किए हैं। आस्ट्रेलिया में अश्विन का औसत सबसे बेहतर रहा है। उन्होंने यहां 42.15 के औसत से 39 विकेट हासिल किए हैं। इंग्लैंड में करीब 33 के औसत से 14 विकेट इस खिलाड़ी के नाम दर्ज हैं।

मजबूत टीमों के खिलाफ प्रदर्शन

भारतीय गेंदबाजों की काबिलियत को मापने के लिए अकसर उनके द्वारा दुनिया की मजबूत टीमों के खिलाफ प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। इनमें आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीम शामिल है। यहां की पिच पर स्पिनरों के लिए ज्यादा कुछ नहीं रहता। उनके लिए यहां की पिचें सबसे ज्यादा कठिन साबित होती हैं। अश्विन के प्रदर्शन को भी इन्हीं पिचों पर जुटाए आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही यह अहम है कि आखिर किस भारतीय ने इन देशों में सबसे अधिक कहर बरपाया है।

बेदी, प्रसन्ना और चंद्रशेखर की जोड़ी के कमाल की बात पहले भी हो चुकी है। उन्होंने मंसूर अली खान पटौदी की कप्तानी वाली टीम को किस तरह इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दिलाई यह इतिहास में दर्ज है। लेकिन इसके बाद पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने भी विदेशी जमीन पर मेजबानों को खूब परेशान किया है।

हालांकि उन्हें आस्ट्रेलिया की पिच ज्यादा रास आती थी लेकिन इंग्लैंड में 2007 टैस्ट सीरीज को कोई कैसे भूल सकता है। इस मुकाबले में उन्होंने 14 विकेट चटकाए थे। आस्ट्रेलिया दौरे पर 2003-04 में भी इस लेग स्पिनर ने 24 विकेट हासिल किए थे। वहीं 2007-08 सत्र में कंगारू देश के दौरे पर उन्होंने 20 विकेट चटकाए थे।

अश्विन भी कुंबले के रास्ते पर चल रहे हैं। हालांकि उनका अभी तक कोई बहुत दमदार प्रदर्शन तो नहीं रहा लेकिन आस्ट्रेलिया में उन्होंने 39 विकेट हासिल किए हैं। इन चार मजबूत देशों की मुश्किल पिचों पर खेलते हुए उन्होंने 84 के स्ट्राइक रेट और 40.1 के औसत से 63 विकेट हासिल किए हैं। कुंबले के नाम सबसे ज्यादा 141, इसके बाद बेदी (90) और प्रसन्ना (78) का नाम आता है।

विदेशी पिच पर भी अश्विन बेहतर

वैसे तो भारतीय स्पिन के इतिहास में बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना और भागवत चंद्रशेखर की जोड़ी काफी मशहूर है। उन्होंने कई मैच सिर्फ अपनी गेंदबाजी के दम पर भारत की झोली में डाले हैं। 1967 से 1971 के बीच का दौर भारतीय प्रशंसकों के लिए गर्व का रहा है। उसी वक्त भारत ने न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में जीत दर्ज कर इतिहास रचा था।

दौर बदला और लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने भारत के लिए स्पिन की अगुआई की। इसके बाद हरभजन सिंह का दौर आया और वे भारत के लिए मैच विजेता गेंदबाज बने। वर्तमान में वही भूमिका अश्विन निभा रहे हैं। हालांकि इसमें थोड़ा अंतर है। अश्विन विकेट चटकाने के मामले में पूर्व दिग्गजों से तेज हैं। घरेलू पिच पर तो कामचलाऊ स्पिनर भी विकेट चटका ले जाता है लेकिन किसी भी गेंदबाज की पहचान पेसर के अनुकूल पिच पर दबदबा बनाने से होती है। अश्विन ने इस मामले में काफी काम किया है।

उन्होंने करीब 64 के स्ट्राइक रेट से विकेट चटकाए हैं। मतलब, हर 10 से 11 ओवर के बीच एक बल्लेबाज को पवेलियन की राह दिखाई है। पूर्व दिग्गज चंद्रशेखर का स्ट्राइक रेट 67.7 का है। प्रसन्ना का 81.4 और बेदी का 85। इस लिहाज से यह कहा जा सकता है कि अश्विन किसी भी दौर के महान स्पिनरों में गिने जाने की काबिलियत रखते हैं।