असम के परिणामः जेल से जीत गए अखिल गोगोई, CAA पर केंद्र के खिलाफ उठाई थी आवाज़, UAPA के तहत हुए थे गिरफ्तार

शिबसागर सीट कभी वामपंथियों का गढ़ हुआ करता था। 90 के दशक में अखिल गोगोई भी भाकपा-माले से जुड़े एकसंगठन के सदस्य रह चुके हैं।

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 जैसा कि चुनाव विशेषज्ञों का आकलन था, असम की शिबसागर विधानसभा सीट से निर्दल प्रत्याशी अखिल गोगोई चुनाव जीत गए। गोगोई नागरिकता कानून के सिलसिले में राष्ट्रद्रोह और हिंसा भड़काने के आरोप में दिसंबर 2019 से जेल में हैं। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजप की सुरभि राजकुंवारी को 9064 मतों के अंतर से हराया।

शिबसागर सीट कभी वामपंथियों का गढ़ हुआ करता था। 90 के दशक में अखिल गोगोई भी भाकपा-माले से जुड़े एक सामाजिक-आर्थिक संगठन के सदस्य रह चुके हैं।माना जाता है कि गोगोई की जीत में उनकी मा प्रियदा गोगोई का बड़ा रोल है। चुनाव प्रचार के दौरान अपने पुत्र के पक्ष में प्रियदा द्वारा चलाए गए भावनात्मक चुनाव प्रचार ने मतदाताओं को अखिल के पक्ष में कर दिया। असम के वित्त मंत्री हिमांत बिश्व शर्मा ने इस जीत पर अखिल गोगोई को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वे रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।

उल्लेखनीय है कि हिमांत और अखिल में छत्तीस का आंकड़ा है। हिमांत को वे फूटी आंखों नहीं सुहाते। अखिल नागरिकता कानून के विरोध का प्रमुख चेहरा रहे हैं। कानून के विरोध में चले आंदोलन में पांच प्रदर्शनकारियों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। इन्हीं प्रदर्शनों के बीच एनआइए ने उन्हें दिसंबर 2019 में यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया था।

वे तब से जेल में हैं। उन पर राष्ट्रद्रोह और हिंसा भड़काने का आरोप है।इस बीच वित्त मंत्री हिमांत बिश्व शर्मा ने कहा है कि असम में वास्तविक शरणार्थियों को सुरक्षा दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि शर्मा को असम के अगले मुख्यमंत्री के दावेदारों में गिना जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य में जिस तरह मूलभूत ढांचे को मजबूत किया गया तथा सड़क, रेलवे और विश्वविद्यालयों के लिए जो नीतियां बनाई गईं, उनसे पार्टी को जीत मिली। लोगों ने सरकार के कोविड प्रबंधन को भी बहुत सराहा। जनता ने विपक्ष के अपवित्र एवं विभाजनकारी दुरभि संधि को भी खारिज करते हुए भाजपा को वोट दिए है।