आठ मंजिला अस्पताल में सिर्फ ओपीडी और टीकाकरण, निगम और दिल्ली सरकार की अनदेखी की भेंट चढ़ा पूर्णिमा सेठी अस्पताल

पचास के दशक में 35 बिस्तरों से शुरू कॉलोनी अस्पताल का 27 अप्रैल 2003 को विस्तार कर 100 बिस्तर किया गया था। तब इसका शिलान्यास कालकाजी के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के हाथों हुआ।

Covid-19, Delhi government hospital

कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों और बिस्तरों की कमी से जूझ रहे दिल्लीवालों को अस्थायी अस्पताल बनाकर इलाज देना पड़ा लेकिन 70 साल पुराने अस्पताल को सुधारने की सुध किसी में नहीं दिखी। दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी स्थित आठ मंजिल के पूर्णिमा सेठी बहुउद्देश्यीय अस्पताल नगर निगम और दिल्ली सरकार की अनदेखी की भेंट चढ़ गई। इतने आपातकालीन समय में भी इस अस्पताल में सिर्फ ओपीडी चलाई जा रही है और लोगों का टीकाकरण हो रहा है।

मौजूदा समय में राजधानी दिल्ली के कोरोना पीड़ित अस्पताल में भर्ती होने के लिए एक अदद बिस्तर की तलाश में भटक रहे हैं। तकलीफ से बचाने के लिए अस्थायी ढांचा रामलीला मैदान और जीटीबी के पास के खाली मैदान में तंबू लगाकर बनाया गया है। लेकिन पूर्णिमा सेठी अस्पताल पर किसी की नजर नहीं गई। अस्पताल के मौजूदा चिकित्सा अधीक्षक डॉ समर सरकार का कहना है कि कोविड को देखते हुए हमने 30 बिस्तरों की सुविधा से शुरू कर 50 बिस्तर तक बढ़ाने की सारी व्यवस्था पूरी कर ली थी, लेकिन संबंधित एजंसियों से एनओसी नहीं मिलने से यह कोविड सेंटर के रूप में तब्दील नहीं हो पाया है। डॉ समर का यह भी कहना है कि सरकार के स्वास्थ विभाग के दिशानिर्देश के मुताबिक यहां भूतल और प्रथम तल पर ही कोविड सेंटर बनाया जा सकता है जिसके लिए आइजीएल से अनुमति लेकर ऑक्सीजन पाइप लगाने का काम चल रहा है। संभव है आगे कोविड के मामलों को देखते हुए यहां भी कुछ बदलाव कर मरीज को लाया जा सकता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
दक्षिणी दिल्ली की महापौर अनामिका ने बताया कि निगम ने दिल्ली सरकार को कोविड के रूप में अस्पताल को तब्दील करने के लिए पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है। हम अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। इलाके की विधायक और आप प्रवक्ता आतिशी से भी प्रतिक्रया के लिए संपर्क किया गया लेकिन उनके प्रतिनिधि ने फोन पर जानकारी लेने के बाद कुछ भी बताने से अनभिज्ञता जाहिर की।

35 बिस्तरों से शुरू हुआ था अस्पताल
पचास के दशक में 35 बिस्तरों से शुरू कॉलोनी अस्पताल का 27 अप्रैल 2003 को विस्तार कर 100 बिस्तर किया गया था। तब इसका शिलान्यास कालकाजी के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के हाथों हुआ। सांसद विजय कुमार मल्होत्रा, नगर निगम के महापौर अशोक कुमार जैन और निगम के मध्य जोन के अध्यक्ष खविंद्र सिंह कैप्टन अध्यक्षता में इसकी शुरुआत की गई लेकिन निगम में कांग्रेस के 2007 से सत्ता से जाते ही यह अस्पताल राजनीति की भेंट चढ़ गया। साल 2015 के अक्तूबर में दक्षिणी दिल्ली वालों के लिए यहां ओपीडी सर्विस शुरू कर दी गई।

तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसका उद्घाटन किया था। यहां ओपीडी शुरू होने से करीब 10 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिलने की बात कही गयी। यहां डेंगू, रक्त, यूरीन टेस्ट जैसी सुविधाएं भी देनी की बात कही गई थी। लेकिन दिल्ली अग्निशमन से एनओसी नहीं मिलने के कारण सिर्फ भूतल और प्रथम तल ओपीडी के लिए खोला जाता रहा। माली हालत सुधरते नहीं देख दक्षिणी निगम ने 2017 में अस्पताल को केन्द्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल को सौंपने की तैयारी पूरी कर ली। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दिल्ली नगर निगम को 417 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना था। तब केन्द्र सरकार इसे 90 वर्ष के लिए इसे लीज ले रही थी।

कुल मिलाकर सरकार इस अस्पताल पर 509 करोड़ रुपये खर्च करती। बाकी वेतन व अन्य खर्च भी थे। तब इस सेंटर को बच्चों के इलाज के केन्द्र के तौर पर विकसित करने की भी बात कही गई थी। लेकिन सब कुछ कागजों तक सिमट कर रह गया। इसे मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए भी निगम ने हाथ पैर मारा था लेकिन ध्यान ही नहीं दिया गया। इस समय आठ मंजिला भवन 24 सौ स्क्वायर फीट के परिसर में कोविड टीका लग रहा है।