आधार से वोटर आईडी लिंक नहीं कराना चाहते तो क्या है नियम, वोट दे सकेंगे या नहीं?

Aadhaar-Voter ID Linking: वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने का काम देश में तेजी से चल रहा है. अब तक करीब 46 करोड़ लोगों के वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक किया जा चुका है. अगली साल पहली अप्रैल तक सभी लोगों के वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने का टारगेट रखा गया है. 

चुनाव सुधार से जुड़ा कानून आने के बाद इस साल 1 अगस्त से सभी राज्यों में आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. वोटरों की पहचान करने और वोटर लिस्ट में डुप्लीकेसी रोकने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है. 

लोगों के वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने के लिए विधानसभाओं में स्पेशल कैम्प बनाए गए हैं. राजधानी दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर 2,684 कैम्प बनाए गए हैं. इन कैम्प में जाकर लोग वोटर आईडी को आधार से लिंक करवा सकते हैं. इसके अलावा, अगर वोटर आईडी नहीं बना है तो वो भी यहां से बनवा सकते हैं. 

पर ऐसा क्यों?

2015 में चुनाव आयोग ने वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने की योजना पर काम शुरू किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. 

इसके बाद 2019 में चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार के लिए वोटर आईडी और आधार कार्ड लिंकिंग की सिफारिश की थी. 

चुनाव सुधार के लिए मोदी सरकार चुनाव कानून में संशोधन के लिए बिल लेकर आई थी. ये बिल अब कानून बन चुका है. इसके साथ ही वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने का रास्ता साफ हो गया है. 

मोदी सरकार के इस कानून को कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी.

वोटर आईडी-आधार लिंकिंग से क्या बदलेगा?

कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें एक ही व्यक्ति वोटर लिस्ट में कई बार अपना नाम दर्ज करवा लेता है. इससे चुनावों में धांधली होती है. इसी धांधली को रोकने के मकसद से वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक किया जा रहा है. 

अब तक ऐसा होता था कि कुछ लोग एक से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड बनवा लेते थे. लेकिन आधार कार्ड तो एक ही है, इसलिए एक व्यक्ति का एक ही वोटर आईडी होगा. इसका एक फायदा ये भी होगा कि इससे फर्जी वोटर आईडी बनवाने पर लगाम लगाई जा सकेगी.

चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि देश में लाखों वोटर्स ऐसे हैं, जिनके नाम दो-तीन जगह की वोटर लिस्ट में हैं. ऐसे में न सिर्फ धांधली होती है, बल्कि वोटिंग प्रतिशत भी खराब होता है. उदाहरण के लिए एक बूथ पर 500 वोटर्स हैं, 300 ने वोट दिया है, जबकि 100 वोटर्स दोहरी लिस्ट में नाम वाले हैं. ऐसे में वोटिंग प्रतिशत 60% हुआ. लेकिन डुप्लीकेसी वालों के नाम हटाने पर 400 वोटर्स बचेंगे और ऐसे में वोटिंग प्रतिशत 75% होगा.

लेकिन आधार लिंक नहीं करवाना हो तो?

इस कानून में साफ लिखा है कि इलेक्टोरल लिस्ट में शामिल हर व्यक्ति को वोटर आईडी से आधार कार्ड लिंक करवाना जरूरी है. लेकिन, इसमें ये भी साफ लिखा है कि अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं है तो उसे इलेक्टोरल लिस्ट से बाहर नहीं किया जा सकता है. यानी, उसे वोट देने से नहीं रोका जा सकता. 

इसका बिल संसद में पेश करते समय भी कानून मंत्री किरन रिजिजू ने कहा था कि वोटर आईडी से आधार को लिंक करवाना वैकल्पिक है. अगर कोई व्यक्ति चाहेगा, तभी उसके वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा. 

इस संबंध में इसी साल मई में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा था वोटर आईडी से आधार लिंक करवाना स्वैच्छिक होगा. हालांकि, जो लोग वोटर आईडी से आधार लिंक नहीं करवाना चाहते, उन्हें इसकी ठोस वजह बतानी होगी.

पर दूसरे दस्तावेज देने होंगे

अगर आपके पास आधार कार्ड नहीं है या फिर इसे वोटर आईडी से लिंक नहीं करवाना चाहते हैं तो दूसरे दस्तावेज देने होंगे. हालांकि, फॉर्म 6-B में लिखा है कि ‘मेरे पास आधार नंबर नहीं है इसलिए मैं इसे लिंक नहीं करवा सकता’, इसका मतलब हुआ कि आपके पास आधार कार्ड नहीं है तो ही आप दूसरे दस्तावेज दे सकते हैं. 

आधार नहीं होने की स्थिति में मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक पासबुक, हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन डॉक्यूमेंट, सर्विस आईडी कार्ड, ऑफिशियल आईडी कार्ड (MPs/MLAs/MLCs), सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से जारी यूनिक आइडेंटिटी आईडी देनी होगी.