‘आप लॉजिकल नहीं हैं, आप लॉजिकल बात सुनिए, इललॉजिकल बात मत करिए’, RLD नेता को एंकर ने लगाई फटकार, भाजपा नेता बोले- बाद में करिएगा तमाशा

ऐंकर का कहना था कि वो आंदोलन पर सवाल नहीं कर रही हैं। उनका मकसद केवल यह जानना है कि आम आदमी का मौलिक अधिकार क्या होता है।

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रिपब्लिक टीवी पर डिबेट के दौरान ऐंकर श्वेता ने RLD नेता को फटकार लगाते हुए कहा कि ‘आप लॉजिकल नहीं हैं, आप लॉजिकल बात सुनिए, इललॉजिकल बात मत करिए। दरअसल, RLD नेता ने सवाल किया था कि सरकार किसानों की बात क्यों नहीं सुन रही है। इस पर भाजपा नेता राजीव जेटली ने कहा-बाद में तमाशा करिएगा।

बीजेपी के राजीव जेटली ने कहा कि राकेश टिकैत जहां जाते हैं, वहां जाति गत जहर घोलते हैं। रेल रोको आंदोलन पर उनका कहना था कि पटरियों पर राजनीतिक कार्यकर्ता बैठे थे। किसान तो दिल्ली की सीमा से उठकर अपने घरों को चले गए हैं। अब राजनीतिक दलों के लोग ही किसान आंदोलन को हवा दे रहे हैं। उनका कहना था कि आम आदमी के नाम पर लड़ी जा रही लड़ाई में आम आदमी को किसान नेता परेशान कर रहे हैं।

ऐंकर ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं से किसान वैसे भी चले गए हैं। अब आंदोलन में दम कहां रहा है। ऐंकर ने कहा कि क्या हर कोई किसानों के लिए सोचेगा। किसान किसी के लिए नहीं सोचेगा। उनका सवाल था कि क्या आम आदमी का कोई अधिकार नहीं है। ऐंकर का कहना था कि वो आंदोलन पर सवाल नहीं कर रही हैं। उनका मकसद केवल यह जानना है कि आम आदमी का मौलिक अधिकार क्या होता है। उनका कहना था कि जब मैं घर जाती हूं तो जाम की वजह से दो घंटे लग जाते हैं। अगर आपके परिवार से कोई घर आने में लेट हो जाए तो आपको भी फर्क पड़ेगा।

विपक्ष के पैनलिस्ट का कहना था कि राकेश टिकैत गांवों में जाकर पंचायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन किसानों को सलाम जो महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष की जो जिम्मेदारी है उसके तहत पूछना चाहता हूं कि क्या पीएम के पास इतना समय है जो क्रिकेट मैच का फोटो हेलीकॉप्टर से ले लेते हैं, लेकिन किसानों से बात करने का समय उनके पास नहीं है। उनका कहना था कि पीएम ने एक अज्ञात फोन नंबर दिया, इसके बारे आप बताए कि वो कौन सा नंबर है, जहां किसान पीएम से बात कर सकें। उनका कहना था कि किसान देश का पेट भरता है। सरकार के पास इतनी भी फुर्सत नहीं है जो उनका दुखड़ा सुन सके। आखिर क्या किसान इस देश के नागरिक नहीं हैं।

सरकार की तरफ बैठे पैनलिस्ट ने कहा कि पंजाब में 4-5 महीने रेल रुकी थीं। इनकी वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजनीतिक किसान का मुखौटा पहनकर जनता को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि सीमा से अब किसान लौट रहे हैं। जो राजनीतिक तमाशा कर रहे हैं, उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सरकार की तरफ से कहा कि धरना देना आपका अधिकार है, लेकिन आप दूसरों को परेशान नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग के समय में फैसला दिया था कि धरने से किसी को परेशान नहीं किया जा सकता।