आम लोगों का दर्द: रोते हुए बोली महिला- अस्पताल ने आखिर तक नहीं बताया कि ऑक्सिजन नहीं है; यूपी में मरीज एंबुलेंस में बेहाल, परिजन बोले- सरकार कहां है, पता नहीं

हर सेकंड अपनी जिंदगी खो रहे लोगों के परिजनों का कहना है कि “एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ाया जा रहा है। कभी कार्ड देकर कहते हैं कि इसे दिखा दो अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा। बाद में कहते हैं कि कुछ नहीं होगा।”

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि महामारी की परीक्षा की घड़ी में राष्ट्रीय राजधानी में वर्तमान स्वास्थ्य ढांचा “चरमरा” गया है। अदालत ने साथ ही दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी के जो भी निवासी कोविड-19 से पीड़ित हैं, उन्हें उपचार की सुविधा मुहैया कराएं। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि सरकार अगर यह कह रही है कि स्वास्थ्य ढांचा नहीं चरमराया है तो वह शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है जो संकट के समय बालू में सिर धंसा लेता है।

पीठ ने दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा से कहा, “आप बालू में सिर धंसाए शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जब आप इस स्थिति का बचाव कर रहे हैं तो आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ रहे हैं। हम हमेशा सच कहेंगे चाहे वह कितना भी कड़वा क्यों नहीं हो।” मेहरा ने पीठ के समक्ष कहा था कि वह यह नहीं कह सकते हैं कि स्वास्थ्य ढांचा चरमरा गया है।

न्यूज-24 पर ऑक्सीजन को लेकर चर्चा के दौरान एंकर संदीप चौधरी ने सबसे बड़ा सवाल कार्यक्रम में दिल्ली के बत्रा हास्पिटल में एक साथ कई मौतों पर चर्चा की तो रजनी सेठ नाम की एक महिला ने रोते हुए अपने भाई को खोने का दर्द बताया। रजनी ने कहा कि अस्पताल वालों ने आखिर तक नहीं बताया कि ऑक्सीजन खत्म हो गया है। कहा कि जब हम कहीं से धक्के खाते हुए ऑक्सीजन लेकर पहुंचे तो वे बोले कि भाई नहीं रहा। रजनी ने रोते हुए कहा कि अस्पताल, सरकार, शासन-प्रशासन की लापरवाही से हमने अपना इकलौता भाई खो दिया।

दूसरी तरफ यूपी के अलीगढ़ में एक अस्पताल के बाहर मरीज एंबुलेंस में ही बेहाल रो रहे हैं। परिजनों की सांस रुक रही है। वे पूछ रहे हैं कि सरकार कहां है। कुछ पता नहीं। हर सेकंड अपनी जिंदगी खो रहे लोगों के परिजनों का कहना है कि “एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ाया जा रहा है। कभी कार्ड देकर कहते हैं कि इसे दिखा दो अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा। बाद में कहते हैं कि कुछ नहीं होगा। 5-5 घंटों से बाहर मरते मरीजों को लेकर खड़े गरीबों के परिजन अब कह रहे हैं कि हम कीड़े-मकोड़े हैं। हमें कोई नहीं पूछेगा।”