आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नहीं दी ज़मानत, कहा- जेल में ही रहकर इलाज करवाइए

कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि आसाराम द्वारा किए गए अपराध सामान्य अपराध नहीं हैं।

Asaram, Jodhpur Jail, PTI आसाराम को जोधपुर की जेल में बंद रखा गया है। (फोटो- PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यौन उत्पीड़न के मामलों में उम्रकैद सहित अलग-अलग सजाओं का सामना कर रहे स्वयंभू संत आसाराम बापू की याचिका खारिज कर दी। याचिका में कहा गया था कि आयुर्वेदिक उपचार के लिए उनकी सजा को कुछ महीनों के लिए निलंबित कर दिया जाए। हालांकि कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि आसाराम द्वारा किए गए अपराध सामान्य अपराध नहीं हैं।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया कि दोषी को अपेक्षित उपचार दिया जा रहा है और याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा, “माफ करें … यह कोई सामान्य अपराध नहीं है। आपको जेल में अपना सारा आयुर्वेदिक उपचार मिलेगा।” बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए मौखिक रूप से यह टिप्पणी की।

दोषी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर बसंत ने कहा कि दो महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है ताकि आसाराम को उसकी बीमारियों का समग्र इलाज मिल सके। राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी ने कहा कि दोषी को जेल में सबसे अच्छा इलाज मिल रहा है और याचिका को खारिज करने का आग्रह किया।

एक अवकाश पीठ ने 4 जून को आसाराम की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था कि उत्तराखंड में हरिद्वार के पास आयुर्वेद के प्रकाश दीप संस्थान में इलाज के लिए उसकी सजा को दो महीने के लिए निलंबित कर दिया जाए।

अपने जवाब में, राज्य सरकार ने कहा था कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इलाज के लिए आईसीयू में रखा गया था और उन्हें ट्रांसफर करने की उनकी याचिका गैर जरूरी साबित हो गई थी। इससे पहले, राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि आसाराम फिट और स्थिर है, लेकिन चिकित्सा उपचार के बहाने अपनी हिरासत का स्थान बदलने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि आसाराम दो यौन उत्पीड़न के मामलों में उम्रकैद की सजा सहित अलग-अलग सजा काट रहा है। आरोपी चिकित्सा उपचार की आड़ में अपनी हिरासत के स्थान को बदलने का प्रयास कर रहा है। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि इस तरह का बदलाव कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

इसमें कहा गया था, “आरोपी जानबूझकर गांधी नगर के साथ-साथ जोधपुर में लंबित मुकदमे में देरी कर रहा है, इस तरह की दलीलों को दुर्भावना के साथ उठा रहा है, जबकि वह स्थिर और फिट है।” राज्य सरकार ने कहा था कि जोधपुर दुर्लभ केंद्रों में से एक है, जहां एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दोनों उपचार उपलब्ध हैं।

इसने यह भी कहा था कि आसाराम को 6 मई को कोविड ​​पॉजिटिव पाया गया था और ठीक से इलाज किया गया था। जोधपुर की एक अदालत ने 25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को 2013 में अपने आश्रम में एक किशोरी के साथ बलात्कार करने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उसके साथी शरद और शिल्पी को इसी मामले में अदालत ने उनकी भूमिका के लिए 20 साल जेल की सजा सुनाई थी। किशोरी ने अपनी शिकायत में कहा था कि आसाराम ने उसे जोधपुर के पास मनाई इलाके में अपने आश्रम में बुलाया और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ दुष्कर्म किया।

आसाराम को 2002 के बलात्कार के एक मामले में भी दोषी ठहराया गया था और 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। आसाराम पर गुजरात के सूरत में भी रेप का केस चल रहा है। आसाराम को इंदौर में गिरफ्तार किया गया और 1 सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया। वह 2 सितंबर 2013 से न्यायिक हिरासत में है।