इतिहास का जयपाल

हाल के एक अध्ययन में पाया गया है कि जनजातीय जीवन और इतिहास को लेकर लिखी गई किताबों के पाठक आज सबसे ज्यादा हैं।

हाकी के बेहतरीन खिलाड़ी थे जयपाल सिंह मुंडा।

हाल के एक अध्ययन में पाया गया है कि जनजातीय जीवन और इतिहास को लेकर लिखी गई किताबों के पाठक आज सबसे ज्यादा हैं। जनजातीय जीवन को लेकर बढ़ी इस जिज्ञासा का ही नतीजा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के संघर्ष और उपलब्धि के बारे में आज कई ऐतिहासिक तथ्यों पर लोग नए सिरे से बात कर रहे हैं।

ऐसा ही एक तथ्य है ओलंपिक में भारत के स्वर्णिम इतिहास से जुड़ा। सामाजिक न्याय के आरंभिक पक्षधरों में से एक, संविधान सभा के सदस्य और हाकी के बेहतरीन खिलाड़ी जयपाल सिंह मुंडा का जिक्र इस लिहाज से उल्लेखनीय है। 1928 के एमस्टर्डम ओलंपिक खेलों में भारत को पहली बार हाकी का स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम के कप्तान जयपाल सिंह मुंडा ही थे। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि मुंडा का व्यक्तित्व और योगदान खिलाड़ी के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी उतना ही प्रभावशाली रहा है। उन्होंने जिस साल भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया, उसी साल उन्होंने आइसीएस की परीक्षा भी पास करके दिखाई थी।