ईरान ने भारत से कहा- रूस की तरह हमसे भी पेश आइए

यूक्रेन से युद्ध के बाद रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत लगातार रूसी बाजार से तेल खरीद रहा है. ऐसे में साल 2019 से भारत और ईरान के बीच बंद तेल सप्लाई को अब ईरान एक बार फिर शुरू करना चाहता है. ईरान का कहना है कि भारत जिस तरह से रूस के मामले में अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज कर रहा है, उसी तरह उसके साथ व्यापार में भी अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह ना करे. एक रिपोर्ट की मानें तो जल्द ही ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा भी कर सकते हैं. 

न्यूज वेबसाइट द प्रिंट के अनुसार, 15-16 सितंबर को उजेबीकिस्तान में होने जा रही SCO (शंघाई सहयोग संगठन) मीटिंग के दौरान ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस बारे में चर्चा कर सकते हैं. SCO काउंसिल मीटिंग में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति समेत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे.

ईरान लगातार कर रहा तेल सप्लाई शुरू करने की बात
हाल ही में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करते हुए तेल की खरीदारी का मामला उठाया था. इससे पहले बीते जून महीने में जब ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर जब भारत दौरे पर थे, तो उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री के साथ मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे को लेकर बातचीत की थी.

ईरानी राजदूत ने कहा था कि भारत से संबंध मजबूत करने के लिए हमारी कोई सीमा, प्रतिबंध और बाधाएं नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हम पहले देश थे जिसने भारत को डॉलर नहीं बल्कि रुपया करेंसी में तेल निर्यात किया और भारत हमसे लगातार तेल खरीदता आया है. यहां तक हमने अन्य चीजों के लिए भी हमने रुपए में कारोबार किया है. 

वहीं ईरानी राजदूत ने ये भी दावा किया कि अगर भारत तेल का आयात नहीं रोकता तो जो ईरान और भारत के बीच साल 2018-19 में 17 बिलियन डॉलर तक कारोबार हो रहा था, वो अब तक 30 से 35 बिलियन तक पहुंच जाता. 

भारत ने कब रोकी ईरान से तेल सप्लाई
साल 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के ऊपर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे. जिसके बाद भारत ने भी ईरान से तेल खरीदारी को रोक दिया था. उस समय ईरान ने भारत के इस फैसले को अमेरिका के दबाव में लिया गया निर्णय बताया था. ईरान पर लगे प्रतिबंधों से पहले भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार था, जबकि चीन ईरान का अभी भी सबसे बड़ा तेल खरीदार है. 

तेल सप्लाई रोकने को लेकर उस समय ईरान ने काफी नाराजगी दिखाई थी. ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा था कि भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव का और मजबूती के साथ प्रतिरोध करना चाहिए था. ईरान ने उस समय कहा था कि भारत को अमेरिका परेशान कर रहा है और हमसे तेल नहीं खरीदने दे रहा है. 

ईरान ने कहा था- हितों की रक्षा करे भारत
ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा था कि भारत अमेरिका का विरोध नहीं करना चाहता है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते भारत को अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए. वहीं भारत ने उस समय कहा कहा था कि हम सिर्फ यूएन की ओर से लगाए जा रहे प्रतिबंधों को मानते हैं, किसी देश के नहीं. 

जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए तो भारत को भी उस समय यह फैसला करना पड़ा था. उस समय अमेरिका और ईरान के संबंध इतने ज्यादा बिगड़ गए थे कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान परमाणु डील से बाहर होने का फैसला कर लिया था. 

रिपोर्ट में बताए गए ईरानी अधिकारियों के बयान के अनुसार, ईरान पर जो प्रतिबंध अमेरिका ने लगाए हुए हैं, वो पूरी तरह से एक तरफा हैं, उसके बावजूद भी भारत ने ईरान से तेल की खरीदारी पर रोक लगा दी. लेकिन अब जब भारत अमेरिकी प्रतिबंधों को किनारे करते हुए रूस से तेल खरीद रहा है तो अब उसे ईरान से भी तेल की सप्लाई शुरू कर देनी चाहिए.

प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद रहा भारत
जबसे यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तबसे अमेरिकी समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.

हालांकि, इन प्रतिबंधों की चिंता किए बिना, भारत रूस से कम दाम पर मिल रहे तेल की खरीदारी कर रहा है. इस बात पर नाराज अमेरिका ने पहले भारत को चेताया भी, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि भारत अपने नागरिकों के हित में फैसले लेने में सक्षम है.