उत्तराखंडः चारधाम यात्रा पर 22 जून तक रोक, HC ने सरकार से तलब किए नए नियम

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से 22 जून तक राज्य में चार धाम यात्रा पर प्रतिबंध लगाते हुए नए नियम अदालत के समक्ष रखने को कहा है।

चारधाम यात्रा को लेकर अदालत ने सरकार से नियमों की जानकारी मांगी है। (एक्सप्रेस फोटो)।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से 22 जून तक राज्य में चार धाम यात्रा पर प्रतिबंध लगाते हुए नए नियम अदालत के समक्ष रखने को कहा है। इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को कहा कि तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण फिलहाल चारधाम यात्रा स्थानीय लोगों के लिए नहीं खोली जा रही है। मालूम हो कि सोमवार को स्थानीय लोगों के लिए चारधाम यात्रा खोलने का निर्णय लिया गया था।

इस संबंध में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने बताया है कि अभी यात्रा शुरू करने के लिए तैयारियां पूरी नहीं हैं और इसके लिए बोर्ड ने 15 दिन का समय मांगा है। उनियाल ने कहा, ‘‘जैसे ही हमारी तैयारियां पूरी हो जाएंगी, हम चारधाम यात्रा आंशिक या पूरी तरह से खोलने का निर्णय ले सकते हैं । हालांकि यह उस समय की परिस्थितियों पर ही निर्भर करेगा ।’’

सोमवार को लिए गए निर्णय में जिन जिलों में चार धाम स्थित हैं, उन जिलों के निवासियों को नेगेटिव आरटी-पीसीआर कोविड-19 जांच रिपोर्ट के साथ मंदिरों के दर्शन की अनुमति दी गयी थी और कहा गया था कि चमोली जिले के निवासी बदरीनाथ धाम, रूद्रप्रयाग जिले के निवासी केदारनाथ तथा उत्तरकाशी जिले के निवासी गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन कर सकेंगे।

वहीं, देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से काली पट्टी बांध कर पूजा-अर्चना कर रहे गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने मंगलवार को एक दिवसीय सांकेतिक उपवास रखा और धरना दिया। गंगोत्री, उसके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा, यमुनोत्री और उसके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली में दोनों धामों के पुरोहितों ने एकदिवसीय सांकेतिक उपवास रखा और धरना दिया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

तीर्थ पुरोहित 11 जून से ही बांह पर काली पट्टी बांधकर धामों में पूजा अर्चना कर रहे हैं। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहित 20 जून को चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए दोनों विश्व प्रसिद्ध धामों में हवन यज्ञ करेंगे और यदि सरकार द्वारा फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई तो वह उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे, जिसका खामियाजा सरकार को आगामी चुनावों में भुगतना पड़ेगा।