उत्तराखंडः हिमस्खलन में नेवी के पांच जवानों समेत छह लापता, पर्वतारोहण के लिए माउंट त्रिशूल जा रहे थे 10 सैनिक

पर्वतारोहियों की खोज में उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) का एक दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। दल का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट कर रहे हैं।

Uttarakhand, Five Navy personnel missing, Avalanche, Mount Trishul, Mountaineering उत्तराखंड में हिमस्खलन का दृश्य। (फोटोः ट्विटर@jaobiden)

पर्वतारोहण के लिए उत्तराखंड के माउंट त्रिशूल पर जा रहे नेवी के पांच जवान हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद से लापता हो गए। उनके साथ जा रहा एक पोर्टर (कुली) भी लापता है। चमोली जिले में आज सुबह हुए हादसे के बाद से जवानों समेत छह लोगों की तलाशी के लिए अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं जुटाया जा सका है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पर्वतारोहियों की खोज में उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) का एक दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। दल का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट कर रहे हैं। निम के अनुसार, भारतीय नौसेना की एडवेंचर विंग ने सुबह करीब 11 बजे राहत एवं बचाव के लिए निम के तलाश एवं बचाव दल से मदद मांगी। लापता पर्वतारोहियों की खोज के लिए सेना का बचाव दल भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। नौसेना का 20 सदस्यीय दल करीब 15 दिन पहले 7120 मीटर ऊंची त्रिशूल चोटी के आरोहण के लिए गया था।

उधर, चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने कहा कि अभी इस बारे में उनके पास कोई अधिकृत सूचना नहीं है लेकिन मामले से संबंधित सूचना जुटाई जा रही है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने अपनी टीमें घटनास्थल की तरफ रवाना की हैं, लेकिन उन्हें भी लापता जवानों का सुराग नहीं मिल सका है। बताया जा रहा है कि मौसम खराब होने की वजह से लापता लोगों का सुराग जुटाने में काफी परेशानी हो रही है। अभियान में सेना, वायु सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल का बचाव दल और हेलीकॉप्टर शामिल है।

आजतक की खबर के मुताबिक नौसेना का 20 सदस्यीय पर्वतारोही दल करीब 15 दिन पहले 7,120 मीटर ऊंची त्रिशूल चोटी के आरोहण के लिए गया था। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे दल चोटी फतह करने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान हिमस्खलन हुआ। इसकी चपेट में नौसेना के पांच पर्वतारोही और एक कुली आ गए। टीवी रिपोर्ट के मुताबिक दल के पांच सदस्य सुरक्षित हैं। छिटपुट चोट लगने के बाद वो वापस अपने बेस कैंप पर लौट आए हैं।

माउंट त्रिशूल चमोली जनपद की सीमा पर स्थित कुमांऊ के बागेश्वर जनपद में है। तीन चोटियों का समूह होने के कारण इसे त्रिशूल कहते हैं। इस चोटी के आरोहण के लिए चमोली जनपद के जोशीमठ और घाट से पर्वतारोही टीमें जाती हैं। यह हिमस्खलन त्रिशूली बेस कैंप से आगे बताया जा रहा है। यह हादसा उस समय हुआ जब कैंप 3 से दल जा रहा था। यह दल त्रिशूली पर्वत पर लगभग 6700 मीटर की ऊंचाई पर ट्रैकिंग करने गया था।