ऋषि कपूर को सिगरेट पीता देख आग बबूला हो गए थे राज कपूर, भरी महफिल में बेटे को मार दिया था थप्पड़

राज कपूर ने ऋषि कपूर को सिगरेट पीते देखा तो वह इस कदर आग बबूला हो गए कि उन्होंने अपने बेटे को भरी महफिल में थप्पड़ मार दिया था।

राज कपूर ने ऋषि कपूर को मार दिया था थप्पड़ (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड के ‘शो मैन’ कहे जाने वाले राज कपूर ने अपनी फिल्मों और अपने स्टाइल से सिनेमा में जबरदस्त पहचान हासिल की थी। माना जाता है कि उन्होंने बॉलीवुड में फिल्में बनाने का तरीका ही बदल दिया था। राज कपूर को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि वह काफी स्मोक करते थे, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था कि उनके बच्चे भी सिगरेट जैसी किसी चीज के आदी बनें। ऐसे में जब राज कपूर ने ऋषि कपूर को सिगरेट पीते देखा तो वह इस कदर आग बबूला हो गए कि उन्होंने अपने बेटे को भरी महफिल में थप्पड़ मार दिया था।

राज कपूर से जुड़ी इस बात का खुलासा खुद ऋषि कपूर ने अपने संस्मरण ‘खुल्लम खुल्ला’ में किया था। ऋषि कपूर ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें स्मोक करते हुए पकड़ लिया था और गुस्से में सबके सामने ही उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

ऋषि कपूर ने इस वक्त को याद करते हुए लिखा, “मुझे वो एक दिन अच्छे से याद है, जब हम अपने पापा की राह देख रहे थे। इस दौरान ही मेरे पिता के मेकअप मैन ने सिगरेट जलाई और मैंने भी उनके साथ-साथ सिगरेट के कुछ कश लगा लिए। इस बीच ही मेरे पिता वहां आ गए।”

ऋषि कपूर ने इस बारे में आगे लिखा, “मुझे सिगरेट पीता देख वह इस कदर भड़क गए कि उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया था। उस थप्पड़ के वजह से मेरे मन में पापा का डर तो बैठ गया, लेकिन वह थप्पड़ मुझे स्मोकर बनने से बिल्कुल भी नहीं रोक पाया।” ऋषि कपूर ने अपने संस्मरण में पिता राज कपूर के निधन का भी जिक्र किया।

ऋषि कपूर ने इस बारे में बात करते हुए लिखा, “2 जून, 1988 को जब मेरे पिता का अस्थमा के कारण निधन हुआ तो मेरे दोस्त को तेल अवीव में एक कैब ड्राइवर ने उनके गुजरने की सूचना दी। इस बात ने हमें यह एहसास दिलाया कि मेरे पिता केवल भारत में ही नहीं, बल्कि इजराइल जैसी जगहों पर भी एक स्टार हैं।”

ऋषि कपूर ने अपनी किताब में बताया कि उनके पिता निधन से एक महीने पहले तक कोमा में थे और उनका इलाज दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में चल रहा था। एक्टर ने बताया कि वह अपने पिता की जिंदगी के लिए प्रार्थना कर रहे थे कि काश कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।