एक विमान अपहरण का किस्सा

अक्षय कुमार विदेशों में फंसे भारतीयों को बचाने वाले और भारत विरोधी आतंकवादियों के धूल चटाने वाले जेम्सबांडीय हीरो के रूप में ढल रहे हैं।

फिल्‍म समीक्षा।

अक्षय कुमार विदेशों में फंसे भारतीयों को बचाने वाले और भारत विरोधी आतंकवादियों के धूल चटाने वाले जेम्सबांडीय हीरो के रूप में ढल रहे हैं। उनकी नई नवेली फिल्म ‘बेल बॉटम’ भी इसी कड़ी में है। कुछ कुछ ‘एअरलिफ्ट’ और ‘बेबी’ को मिला करके बनी एक खुफिया व एक्शन फिल्म। इसकी पृष्ठभूमि में एक वास्तविक घटना भी है। इंदिरा गांधी के जमाने में हुए एक हवाई जहाज का अपहरण किए जाने
का वाकया।

फिल्म में अक्षय कुमार ने बेलबॉटम कोडनेम वाले एक खुफिया रॉ एजंट का किरदार निभाया है। बेलबॉटम अगवा किए गए भारतीय हवाई जहाज और उसके यात्रियों को किस तरह छुड़ा लाता है। यह फिल्म उस दौर की याद भी दिलाती है जब खालिस्तानी आतंकवाद सक्रिय था और पाकिस्तान उसकी परोक्ष और प्रत्यक्ष मदद कर रहा है। पाकिस्तान में तब जनरल जिया का शासन था और आम धारणा थी कि भारत ने जिस तरह बांग्लादेश को आजाद कराया था उसका बदला लिए जाने की योजना सीमा पार बन रही है।

बेल बॉटम में ये सारे पहलू भी उभरते हैं। लारा दत्ता ने इसमें इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई है। हालांकि प्रचार के दौरान ये जोरशोर से बताया गया कि वे इस रोल में छा गई हैं, पर फिल्म देखने के बाद ये आम राय उभरेगी कि वे इंदिरा गांधी के आस पास तो क्या दूर दूर तक नहीं है। जहां तक वाणी कपूर का सवाल है, वे अंशुल मल्होत्रा उर्फ बेलबॉटम (अक्षय कुमार) की पत्नी की भूमिका में हैं। लगभग पूरी फिल्म में एक पारिवारिक फोटोशूट के लिए हमेशा तैयार घरेलू महिला के रूप में है।

उनसे अधिक जानदार रोल तो डॉली आहलूवालिया का है जो उनकी सास यानी अक्षय कुमार की मां बनी हैं। हुमा कुरैशी एक डबल क्रास करने वाली खुफिया एजंट हैं लेकिन उनकी भूमिका भी छोटी है। फिल्म पूरी तरह से अक्षय कुमार की है। एक ऐसे खुफिया एंजंट की जो वैसे तो मातृभक्त है, शतरंज के खेल में माहिर है और कई भाषाएं जानता है लेकिन दूसरी तरफ जबर्दस्त डेटा एनालिस्ट है और मौका मिलते ही जाबांज हो जाता है। अक्षय इस तरह की भूमिका में पहले भी हिट हो चुके हैं और इस बार भी कुछ ऐसी ही संभावना है।

फिल्म में कुछ गाने भी हैं लेकिन बस यूं ही हैं। हॉल से निकलने के बाद याद भी नहीं रहता कि उनके बोल क्या है। हां, क्लाइमेक्स जबर्दस्त है। कुछ मजेदार असंगतियां भी हैं। जैस अंशुल यानी अक्षय कुमार के बड़े भाई का दादा बनने की उम्र में पहली बार पिता बनना हंसने का अतिरिक्त मसाला दे देता है। एक अरसे के बाद कोई सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसलिए इसका विशेष आकर्षण है।