एमजे अकबर मानहानि केस में प्रिया रमानी बरी, कोर्ट ने कहा-राइट ऑफ reputation से ज्यादा महत्वपूर्ण है राइट टू dignity

कोर्ट ने कहा, अकबर एक सम्मानित व्यक्ति हैं, लेकिन उनके जैसे रुतबे का व्यक्ति भी यौन उत्पीड़न कर सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को अधिकार है कि दशकों बाद भी वो अपना दुखड़ा लोगों के सामने रख सके।

Defamation Case

एमजे अकबर मानहानि केस में दिल्ली की एक कोर्ट ने पत्रकार प्रिया रमानी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वह राइट ऑफ reputation से ज्यादा महत्वपूर्ण है राइट टू dignity को मानती है। कोर्ट ने कहा, अकबर एक सम्मानित व्यक्ति हैं, लेकिन उनके जैसे रुतबे का व्यक्ति भी यौन उत्पीड़न कर सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को अधिकार है कि दशकों बाद भी वो अपना दुखड़ा लोगों के सामने रख सके।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडेय की अदालत में इस मामले से जुड़े सारे पक्ष दोपहर दो बजे एकत्र हो गए थे, लेकिन सभी को आधे घंटे के लिए बाहर जाने का आदेश कोर्ट ने दिया। सभी को बताया गया कि जजमेंट में सुधार किया जा रहा है। आप सभी लोग कुछ देर के बाद कोर्ट रूम में आएं। जब कोर्ट दोबारा लगी तो जज ने कहा कि समाज को समझना होगा कि sexual abuse और प्रताड़ना का पीड़िता पर क्या असर होता है। कोर्ट ने कहा कि जिस समय प्रिया रमानी के साथ यह घटना हुई तब विशाखा गाइडलाइन अस्तित्व में नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे 1997 से लागू किया। अदालत ने वर्किंग प्लेस पर महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना का भी संज्ञान लिया।

इससे पहले ये फैसला 10 फरवरी को आने वाला था, लेकिन कोर्ट ने इसे आज तक के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने तब कहा था कि मामले से जुड़े पक्षों के लिखित बयान उन्हें देरी से मिले हैं। रमानी का दावा है कि दिसंबर 1993 में मुंबई के होटल ओबेरॉय में उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। तब एमजे अकबर ने उन्हें जॉब इंटरव्यू के लिए होटल में बुलाया था। रमानी ने जब ट्विटर पर आपबीती बयान की तो अक्टूबर 2018 में अकबर ने रमानी के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर दिया। ट्रायल के दौरान रमानी ने खुद पर बीतीं सारी चीजें बयान की, जबकि अकबर का कहना था कि वो रमानी से उस दिन होटल में मिले ही नहीं थे।

रमानी ने ट्रायल में कहा कि सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने अपनी कहानी बयान की है। उन्हें नहीं लगता कि उसके बाद उनके आरोपों से अकबर की छवि को कोई धक्का लगा। जबकि अकबर ने रमानी पर जानबूझकर गलत बयानी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जो घटना हुई नहीं, उसके जरिए रमानी उन्हें फंसाने पर आमादा हैं। अकबर की तरफ से यह भी कहा गया कि रमानी ने इस घटना को लेकर कहीं भी शिकायत दर्ज नहीं कराई। उन्हें केवल सोशल मीडिया ट्रायल के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अकबर के मुताबिक, रमानी अपने आरोपों को साबित करने में नाकाम रही हैं। मामले में अकबर की तरफ से गीता लूथरा और संदीप कुमार ने जिरह की, जबकि रमानी का पक्ष रेबेक्का जॉन ने रखा।