कचरे से बनेंगी द‍िल्‍ली की सड़कें! जानें कहां से हो रही पायलेट रोड की शुरूआत?

देश में किसी नगर निगम का ठोस अपशिष्ट से रोड बनाने का पहला अनूठा प्रोजेक्ट होगा.

देश में किसी नगर निगम का ठोस अपशिष्ट से रोड बनाने का पहला अनूठा प्रोजेक्ट होगा.

Waste to Wealth Mission: पूर्वी दिल्ली नगर निगम और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय की एक तकनीकी टीम ने तीन साइटों का दौरा किया. लेकिन इसके लिये पायलेट प्रोजेक्ट रोड के रूप में कल्याण पुरी को अंतिम रूप दियाहै.पायलट Project को मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के कचरे से सपंदा मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है.

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नई दिल्ली. गाजीपुर लैंडफिल साइट (Ghazipur Landfill Site) के कचरे से अब पूर्वी दिल्ली नगर निगम (East Delhi Municipal Corporation) सड़क तैयार करेगी. पूर्वी निगम केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (Central Road Research Institute) के साथ मिलकर पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरूआत करेगी.

करीब 25,000 मीट्रिक टन लिगेसी कचरे (Legacy waste) का उपयोग कल्याणपुरी में लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के रूप में किया जाएगा. यह देश में किसी नगर निगम का ठोस अपशिष्ट से रोड बनाने का अपना पहला अनूठा प्रोजेक्ट होगा.

जानकारी के मुताबिक पूर्वी दिल्ली नगर निगम और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ भारत सरकार के   प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय की एक तकनीकी टीम ने तीन साइटों का दौरा किया. लेकिन इसके लिये पायलेट प्रोजेक्ट रोड के रूप में कल्याण पुरी को अंतिम रूप दिया है.  पायलट Project को मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के कचरे से सपंदा मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है.

वेस्ट टू वेल्थ मिशन (Waste to Wealth Mission) प्रधानमंत्री विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (Prime Minister’s Science, Technology, and Innovation Advisory Council) के नौ वैज्ञानिक मिशनों में से एक है, जो कचरे से सपंदा हेतू प्रौद्योगिकियों की पहचान कर, परीक्षण कर क्रियान्वियन पर आधारिक है.
मिशन ने गाजीपुर डपिंग साइट को प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है. इस पायलट रोड में पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) सड़को को गड्ढे भरने और सड़क निर्माण के लिए लैंडफिल साइट से पृथकीकृत कचरा देगा जिससे लैंडफिल साइट से कचरे की मात्रा को कम कर उसकी उंचाई कम की जा सकेगी.

वहीं कचरे का रचनात्मक रूप से प्रयोग करके सड़क बनाई जा सकेगी. साथ ही इस पायलट रोड को बनाने में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान इसकी रूप-रेखा देकर तकनीकी रूप से सहयोग देगा.