कभी पहनने को नहीं थे स्पाइक्स शूज, सिंगल मदर ने कपड़े सिलकर पाला; युवाओं के लिए इंसपायरिंग है U20 वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट शैली सिंह के संघर्ष की कहानी

लंबी कूद की यह प्रतिभाशाली एथलीट सिर्फ एक सेंटीमीटर से गोल्ड मेडल जीतने और इतिहास रचने से चूक गई, लेकिन उसने अपने सुनहरे भविष्य के संकेत जरूर दे दिए। शैली के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी से नैरीबी तक का सफर कतई आसान नहीं रहा है।

Shaili Singh U20 World Championship Silver Medal inspiring Story Neeraj Chopra शैली सिंह अंडर-20 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल नहीं जीत पाने के कारण नीरज चोपड़ा और हिमा दास के रिकॉर्ड की बराबरी करने से चूक गईं। (सोर्स- ट्विटर/Athletics Federation of India)

भारत की 17 साल की शैली सिंह ने रविवार यानी 23 अगस्त 2021 को अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप रजत पदक जीता। लंबी कूद की यह प्रतिभाशाली एथलीट सिर्फ एक सेंटीमीटर से गोल्ड मेडल जीतने और इतिहास रचने से चूक गई, लेकिन उसने अपने सुनहरे भविष्य के संकेत जरूर दे दिए। शैली के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी से नैरीबी तक का सफर कतई आसान नहीं रहा है। उनके संघर्ष के कहानी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। शैली के संघर्ष और सफलता में उनकी मां विनीता का भी बहुत बड़ा हाथ है।

शैली ने अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 6.59 मीटर की कूद के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। स्वीडन की मौजूदा यूरोपीय जूनियर चैंपियन माजा अस्काग ने 6.60 मीटर के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिग्गज लंबी कूद खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज की शिष्या शैली प्रतियोगिता के आखिरी दिन तीसरे दौर के बाद तालिका में शीर्ष पर थीं लेकिन स्वीडन की 18 साल की खिलाड़ी ने चौथे दौर में उनसे एक सेंटीमीटर का बेहतर प्रदर्शन किया, जो निर्णायक साबित हुआ। यूक्रेन की मारिया होरिएलोवा ने 6.50 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता। शैली ने रविवार को अपने पहले प्रयास में 6.34 मीटर की छलांग लगाई। उन्होंने दूसरे प्रयास में भी इसी प्रदर्शन को दोहराया लेकिन उनका तीसरा प्रयास सर्वश्रेष्ठ रहा। उनके अगले दोनों प्रयास अवैध रहे।

शैली की मां विनीता सिंह सिंगल मदर हैं। शैली अपने परिवार की पहली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने खेलों को अपनाया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद ट्रैक एंड फील्ड में करियर बनाने को प्रोत्साहित करने के लिए शैली अपनी मां को धन्यवाद देती हैं। विनीता ने ही एक अखबार के विज्ञापन को देखकर शैली को चयन ट्रायल के बारे में चौकन्ना किया था।

विनीता ने शैली समेत तीन बेटियों को अकेले पाला है। विनीता सिलाई का काम करती हैं। उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा है। बचपन में शैली के पास पहनने के लिए स्पाइक्स शूज भी नहीं होते थे, लेकिन मां ने कभी अपनी बेटी को हताश नहीं होने दिया। शैली का लखनऊ स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल में चयन हो गया था, लेकिन उनको बड़ा ब्रेक अंजू बॉबी जॉर्ज के पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज की नजर में आने के बाद मिला।

साल 2017 में शैली जब 14 साल की थीं, तब विजयवाड़ा में राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप हुई। रॉबर्ट भी वहां मौजूद थे। शैली उस प्रतियोगिता में पदक नहीं जीत पाईं, लेकिन रॉबर्ट को पता चल गया था कि झांसी की इस नई रानी में कुछ खास है। उन्होंने शैली को बेंगलुरु स्थित अंजू बॉबी जॉर्ज एकेडमी ट्रेनिंग के लिए बुलाया। शुरुआत में शैली की मां इसके लिए राजी नहीं थीं, लेकिन रॉबर्ट ने उन्हें समझाया कि उनकी बेटी एक चैंपियन एथलीट बन सकती है। इसके बाद शैली ने रॉबर्ट जॉर्ज से कोचिंग लेनी शुरू की।

रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज कहते हैं कि लंबी कूद में तेजी और ताकत काफी मायने रखती है। शैली के पास बेहतरीन स्पीड है। उन्होंने कहा, जैसे-जैसे शैली बड़ी होगी, उनकी ताकत भी बढ़ती जाएगी। वह और भी ऊंचे मुकाम हासिल कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए शैली को बहुत ज्यादा मेहनत करनी होगी। अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि शैली आने वाले दिनों में उनका रिकॉर्ड भी तोड़ेंगी और देश के लिए ओलिंपिक में मेडल जीतेंगी।

22 अगस्त 2021 को गोल्ड मेडल से चूकने के बाद शैली अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं। उन्होंने नम आंखों के साथ कहा, ‘मैं 6.59 मीटर से भी बेहतर कूद सकती थी और स्वर्ण जीत सकती थी। मेरी मां ने मुझे स्वर्ण पदक के बाद स्टेडियम में गाए जाने वाले राष्ट्रगान के बारे में बताया था (लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकी)।’

उन्होंने कहा, ‘मैं 17 साल की हूं, मैं अगली अंडर 20 विश्व चैम्पियनशिप (काली, कोलंबिया) में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं। अगले साल एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन होना है और मैं उन प्रतियोगिताओं में अच्छा करना चाहती हूं।’

उनके कोच बॉबी जॉर्ज कहा कि छलांग लगाने के बाद नीचे आते समय उससे मामूली तकनीकी चूक हो गई, नहीं तो वह स्वर्ण जीत सकती थी। उन्होंने कहा, ‘वह स्पर्धा के बाद रो रही थी, उसे पता था कि वह स्वर्ण जीत सकती थी। छलांग से नीचे आते समय कुछ तकनीकी समस्या हो गई, नहीं तो वह 6.65 से 6.70 मीटर की दूरी तय कर सकती थी।’

उन्होंने कहा, ‘यह किसी प्रतियोगिता में पहली बार है जब उसने स्वर्ण नहीं जीता है। वह रजत पदक को पसंद नहीं करती है। वह नीरज चोपड़ा के बाद एथलेटिक्स में देश की अगली बड़ी खिलाड़ी बन सकती है।’

पदकों की संख्या के मामले में इन खेलों में यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उसने मौजूदा अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो रजत और एक कांस्य पदक जीते हैं। हालांकि, इससे पहले ओलंपिक चैंपियन भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा (2016) और फर्राटा धाविका हिमा दास (2018) ने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था।

मौजूदा सत्र में इससे पहले मिश्रित चार गुणा 400 मीटर रिले टीम ने बुधवार को कांस्य पदक जीता, जबकि पैदल चाल खिलाड़ी अमित खत्री ने 10,000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता था।