कभी स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहनने पर लोग मारते थे ताने, अब कैनोइंग प्लेयर्स के लिए रोल मॉडल बनीं जम्मू-कश्मीर की बिलकिस मीर

पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय युवाओं में कयाकिंग और कैनोइंग के प्रति रुचि बढ़ेगी। उन्होंने कहा, ‘उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे एशियाई देश भी इस खेल में मजबूती से उभर रहे हैं। मेरा मानना है कि भारत भी भविष्य में इस खेल में आगे बढ़ सकता है।’

Bilquis Mir water queen of Jammu and Kashmir बिलकिस मीर को जम्मू-कश्मीर की ही नहीं, बल्कि देश की वाटर क्वीन के नाम से भी जाना जाता है। (सोर्स- फेसबुक और ट्विटर)

बिलकिस मीर जम्मू एंड कश्मीर से कैनोइंग की पहली अंतरराष्ट्रीय महिला काइऐकर (नौका चालक) और पहली इंटरनेशनल जज हैं। 34 साल की बिलकिस मीर राज्य के साथ-साथ देश में भी वाटर स्पोर्ट्स के अग्रदूतों (अगुआकारों) में से एक हैं। वह युवा कैनोइंग प्लेयर्स के लिए रोल मॉडल हैं। हालांकि, बिलकिस मीर ने यहां तक पहुंचने में बहुत संघर्ष झेला है।

बिलकिस मीर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि जब उन्होंने कैनोइंग शुरू की थी, तब बहुत सारे लोग उन पर या उनके परिवार पर हंसते थे। ताने मारते थे। बिलकिस मीर कहती हैं, ‘महिलाओं के लिए स्विमिंग या वाटर स्पोर्ट्स तब एक टैबू (वर्जित कार्य) था। मुझे अब भी याद है कि जब मैंने कयाक इवेंट्स के लिए स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहने थे तो कैसे लोगों ने मुझे ताने मारे थे। हालांकि, अब मुझे खुशी है कि मैं जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ अन्य राज्यों के एमर्जिंग प्लेयर्स के अलावा युवाओं के लिए भी एक रोल मॉडल बन सकती हूं।’

उन्होंने कहा, ‘हंगरी में आईसीएफ वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, 2010 से 2015 तक भारतीय टीम को कोचिंग देने से मुझे एक व्यक्ति के रूप में विकसित होने में मदद मिली। डल झील के वाटर स्पोर्ट्स सेंटर में, हमने 100 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया है, जिन्होंने राष्ट्रीय पदक जीते हैं। उन्हें सफलता हासिल करते हुए देखकर मुझे प्रेरणा मिलती है।’

बिलकिस मीर ने 2009 में हंगरी में आईसीएफ स्प्रिंट विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 2010 से 2015 तक भारतीय कैनोइंग टीमों को कोचिंग दी। वह 2018 एशियाई खेलों में जज भी बनीं। इसके अलावा वह जम्मू एंड कश्मीर वाटर स्पोर्ट्स काउंसिल में निदेशक (वाटर स्पोर्ट्स) हैं। बिलकिस मीर कनू स्लैलम, इंडियन कयाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन की अध्यक्ष भी हैं।

पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय युवाओं में कयाकिंग और कैनोइंग के प्रति रुचि बढ़ेगी। उन्होंने कहा, ‘जब हम ओलंपिक खेलों की बात करते हैं, तो पदकों के मामले में कैनोइंग, कनू स्प्रिंट में 12 स्पर्धाओं के साथ पांचवां सबसे बड़ा खेल बना रहता है। टोक्यो ओलंपिक में कनू स्लैलम में चार इवेंट और टोक्यो पैरालिंपिक में नौ इवेंट हुए थे। उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे एशियाई देश भी इस खेल में मजबूती से उभर रहे हैं। मेरा मानना है कि भारत भी भविष्य में इस खेल में आगे बढ़ सकता है।’

उन्होंने कहा, ‘हाल ही में हमने देखा कि प्राची यादव टोक्यो पैरालिंपिक में हिस्सा लेने वाली और सेमीफाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली पैरा कनू प्लेयर बनीं। केंद्र सरकार ने श्रीनगर में वाटर स्पोर्ट्स में एक्सीलेंस सेंटर खोलने की घोषणा की है।’

उन्होंने कहा, ‘इस तरह की पहल से इस खेल के प्रति युवा ज्यादा आकर्षित होंगे। सही योजना और बुनियादी ढांचे के साथ, हम भी ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने और पदक जीतने का सपना देख सकते हैं।’