करनाल में किसानों पर लाठीचार्जः बोले टिकैत- देश में ‘सरकारी तालिबानों’ का कब्जा, कमांडर भी हैं जो दे रहे सिर फोड़ने के आदेश

केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी के नेताओं के सामजिक बहिष्कार का ऐलान कर रखा है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर ही शनिवार को किसान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में होने वाली भाजपा की बैठक का विरोध करने कार्यक्रम स्थल की तरफ जा रहे थे।

शनिवार को हरियाणा के करनाल में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में कई किसान गंभीर रूप से घायल हो गए। (एक्सप्रेस फोटो)

शनिवार को हरियाणा के करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मीटिंग का विरोध करने पहुंचे प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें कई किसान गंभीर रूप से घायल हो गए और कईयों के सिर तक फूट गए। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत भड़क गए और उन्होंने कहा कि देश में सरकारी तालिबानों का कब्ज़ा हो चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश में सरकारी तालिबानों के कमांडर भी मौजूद हैं जिन्होंने सर फोड़ने के आदेश दिए हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश में सरकारी तालिबानों का कब्ज़ा हो चुका है। देश में सरकारी तालिबानों के कमांडर मौजूद है। इन कमांडरो की पहचान करनी होगी। जिन्होंने सर फोड़ने का आदेश दिया वही कमांडर है। साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस फ़ोर्स की ताकत के सहारे वे पूरे देश पर कब्ज़ा करना चाहते हैं।

इसके अलावा राकेश टिकैत ने अपने ट्विटर हैंडल से करनाल में हुए लाठीचार्ज में घायल किसान की तस्वीर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर भी हमला बोला। राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का व्यवहार जनरल डायर जैसा है। जो अत्याचार हरियाणा पुलिस ने किसानों पर किया वह बर्दाश्त नहीं हो सकता। किसान सबका हिसाब करेगा।

बता दें कि केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी के नेताओं के सामजिक बहिष्कार का ऐलान कर रखा है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर ही शनिवार को किसान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में होने वाली भाजपा की बैठक का विरोध करने कार्यक्रम स्थल की तरफ जा रहे थे। उसी दौरान करनाल में तैनात भारी पुलिस बल ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। जिसमें कई किसानों को गंभीर चोटें आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को 9 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने आखिरी मीटिंग में तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे नामंजूर कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हुए हैं।