कल्याण सिंह से अकेले में बात करना चाहते थे नरेंद्र मोदी, कर दिया था इनकार, लंबे इंतजार के बाद दिया था मिलने का समय

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का 21 अगस्त को लखनऊ में निधन हो गया। कल्याण सिंह की नाराज़गी के बाद आरएसएस ने नरेंद्र मोदी को उनसे मिलने भेजा था। लेकिन उन्हें काफी इंतजार करना पड़ गया था।

Narendra Modi, Kalyan Singh कल्याण सिंह के साथ नरेंद्र मोदी (File Photo)

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का लंबी बीमारी के बाद 21 अगस्त को लखनऊ में निधन हो गया। सिंह 89 साल के थे और उन्होंने करीब सवा नौ बजे आखिरी सांस ली। कल्याण सिंह की गिनती बीजेपी के दिग्गज नेताओं में होती थी और उन्होंने बतौर सीएम अपने कार्यकाल में शिक्षा में सुधार के लिए कई अहम फैसले लिए थे। हालांकि एक वक्त पर असहमतियों के चलते वे बीजेपी से अलग भी हो गए थे।

कल्याण सिंह को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का करीबी भी माना जाता था। यही वजह थी कि जब वे 90 के दशक में बीजेपी से नाराज़ हो गए थे तो संघ ने नरेंद्र मोदी को उनसे मुलाकात करने के लिए भेजा था। मोदी तब आरएसएस के प्रचारक थे, लेकिन सिंह ने उन्हें लंबा इंतजार करवा दिया था। इसका जिक्र बीजेपी के एक नेता ने ‘बीबीसी’ से बातचीत में भी किया है।

बकौल बीजेपी नेता, नरेंद्र मोदी तब आरएसएस प्रचारक थे। संघ ने उन्हें कल्याण सिंह से बातचीत के लिए भेजा। हालांकि कल्याण सिंह से मिलने के लिए उन्हें कई दिनों का इंतजार करना पड़ा। जब कल्याण सिंह से उनकी मुलाकात हुई तो वह कई लोगों के साथ बैठे हुए थे। नरेंद्र मोदी उनसे अकेले में बात करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस बातचीत के दौरान कल्याण सिंह की नाराज़गी भी साफ नज़र आई और उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी सफाई भी नहीं दी।

ढांचा गिरती ही लिख दिया था इस्तीफा: 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। इस दौरान सूबे की कमान कल्याण सिंह के हाथ में ही थी। कल्याण सिंह के प्रधान सचिव रहे योगेंद्र नारायण ने इसी को याद करते हुए ‘बीबीसी’ को बताया था, ‘कल्याण सिंह ने गोली चलाने की अनुमति नहीं दी तो डीजीपी ये सुन कर वापस अपने दफ़्तर लौट गए थे। जैसे ही बाबरी मस्जिद की आखिरी ईंट गिरी, कल्याण सिंह ने अपना राइटिंग पैड मंगवाया और अपने हाथों से अपना त्याग पत्र लिखा और उसे लेकर खुद राज्यपाल के यहां पहुंच गए थे।

गोली नहीं चलवाने का फैसला किया: कल्याण सिंह को इसके बाद न सिर्फ अपना मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा बल्कि उन्हें एक दिन की जेल भी हुई थी। सीएम रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ढांचा बचाने के लिए हलफनामा दाखिल किया था, दूसरी तरफ कार सेवकों पर गोली नहीं चलाने के लिए कहा।

एक भाषण में उन्होंने कहा था, ‘मुझे केंद्रीय मंत्री शंकरराव चव्हाण का फोन आया। उन्होंने बताया कि ढांचे के गुंबद पर कार सेवक चढ़ गए हैं और उन्होंने गुंबद तोड़ना शुरू भी कर दिया है। लेकिन मैंने साफ कह दिया कि उन पर गोली नहीं चलवाऊंगा, नहीं चलवाऊंगा, नहीं चलवाऊंगा।