कश्मीर में बोले सेना के अधिकारी- दूसरे देशों में ‘पाकी’ पुकारा जाना गाली की तरह, पूछा- क्या आप बनाना चाहते हैं पाकिस्तान जैसा समाज

कश्मीर में जारी आतंकी हमलों के बीच राजपूताना राइफ्लस के लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लों ने कश्मीरी लोगों से उनकी विरासत पहचानने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के बहकावे में आकर कश्मीरी ऐसा काम ना करें, जिससे उनकी पहचान एक गाली बन जाए।

indian army kashmir, terror attak, pakistan कार्यक्रम में बोलते लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लों (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट @ANI)

जम्मू-कश्मीर में इन दिनों आतंकियों के निशाने पर गैर कश्मीरी आ गए हैं। आतंकी घटनाओं में भी राज्य में वृद्धि देखने को मिल रही है। हाल के दिनों में देखा गया कि स्थानीय भी आतंकी घटनाओं में शामिल हो रहे हैं। यही कारण है कि सेना को इन दिनों घाटी में कई चुनौतियों का सामना कर पड़ रहा है।

एक तरफ सेना जहां आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी है तो दूसरी तरफ कश्मीरियों को समझाकर सही रास्ते पर भी लाने का काम कर रही है। ऐसे ही एक कार्यक्रम में राजपूताना राइफ्लस के लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लों ने कश्मीरी लोगों से कहा कि वो अपनी विरासत को पहचानें, पाकिस्तान के बहकावे में आकर ऐसा काम ना करें, जिससे उनकी पहचान एक गाली बन जाए।

सेना के इस अधिकारी का वीडियो एएनआई ने ट्विट किया है। केजेएस ढिल्‍लों श्रीनगर में हो रहे एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने आतंकी घटनाओं में हो रही मौतों पर चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर अगर इन घटनाओं पर चुप रहते हैं तो वो अपने बोलने के अधिकार को खो देंगे। उन्हें किसी भी सब्जेक्ट पर बोलने का कोई अधिकारी नहीं रहेगा।

आगे उन्होंने कहा- “जो लोग विदेश यात्रा कर चुके हैं, वे जानते हैं कि हवाईअड्डों की जांच कैसे होती है। पश्चिमी दुनिया में ‘पाकी’ कहलाना गाली है। क्या आप ऐसा समाज बनाना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं जब कोई आपको कश्मीरी कहे तो बेइज्जती लगे”।

केजेएस ढिल्‍लों ने कहा कि आपका पांच हजार साल पुराना इतिहास रहा है। उसमें शांत, इंसानियत, सूफी शामिल है। लेकिन क्या आज आप उस दिशा में नहीं बढ़ रहे हैं जहां कोई आपका नाम ले और वो गाली जैसा लगे। उन्होंने आगे कहा कि लूजर कौन है? हमारी कश्मीरी मां, जिसके बच्चे को मदरसे में धकेल दिया गया और एक दिन, एक साल के भीतर उसकी मृत्यु हो गई।

बता दें कि हाल के दिनों में कई प्रवासी मजदूरों को कश्मीर में आतंकियों ने मार दिया है। वहां रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग आतंकियों के ‘टारगेट किलिंग’ के निशाने पर है। इन हमलों में सिख समुदाय से लेकर कश्मीरी पंडितों और गैर कश्मीरी लोगों की मौत हो चुकी है।