कांग्रेस में पीके के शामिल होने की खबरों से नाराज़ कई सीनियर नेता, सिब्बल के घर पर जी-23 की बैठक में चर्चा

जी -23 के कुछ नेताओं के बारे में कहा जा रहा है कि वे प्रशांत किशोर की पार्टी में लेट्रल एंट्री के खिलाफ हैं, लेकिन नाराज नेताओं का यह समूह फिलहाल “वेट एंड वॉच” का रुख अपनाये हुए है।

prashant kishor, pk, india news रणनीतिकार प्रशांत क‍िशोर। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः ताशी तोबग्याल)

30 अगस्त को कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के घर पर जन्माष्टमी समारोह के बहाने जी-23, या कांग्रेस के 23 नाराज नेताओं ने पार्टी में मामलों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। यह जानकारी सूत्रों ने दी। सूत्रों ने बताया कि इस मीटिंग में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना पर भी बातचीत हुई।

जी -23 के कुछ नेताओं के बारे में कहा जा रहा है कि वे प्रशांत किशोर की पार्टी में लेट्रल एंट्री के खिलाफ हैं, लेकिन नाराज नेताओं का यह समूह फिलहाल “वेट एंड वॉच” का रुख अपनाये हुए है। याद हो कि जी -23 द्वारा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को संगठन में सुधार को लेकर साल भर पहले एक पत्र लिखा गया था।

कपिल सिब्बल के घर पर जमा होने वालों में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, शशि थरूर, मुकुल वासनिक, विवेक तन्खा और भूपिंदर सिंह हुड्डा शामिल थे। कुछ वरिष्ठ नेता, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे प्रशांत किशोर के शामिल होने का समर्थन कर रहे हैं, वर्चुअल तरीके से मीटिंग में शामिल हुए।

नाराज नेताओं में से एक ने बताया, “पार्टी को आउटसोर्स करने के बारे में निश्चित रूप से गंभीर आशंकाएं हैं। कांग्रेस के पास बहुत सारे प्रतिभाशाली लोग हैं। लेकिन यह एक फ्लैशपॉइंट नहीं बनेगा क्योंकि हम अभी वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “आखिरकार, यह कांग्रेस कार्य समिति [सीडब्ल्यूसी] है, न कि जी -23 जो एक निर्णय लेगी।” वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी और अंबिका सोनी को सीडब्ल्यूसी सदस्यों का फीडबैक लेने के लिए कहा गया था। जिसके बाद, सीडब्ल्यूसी सदस्यों के बीच अलग-अलग समूहों में विचार-विमर्श किया गया।

हालाँकि, प्रशांत किशोर को महासचिव और सीडब्ल्यूसी सदस्य बनाने पर राय विभाजित है। एक नेता ने कहा, “कांग्रेस 135 साल पुरानी संस्था है न कि कोई स्टार्ट-अप जहां कोई फैंसी विचारों के साथ आता है और उसे संभाल लेता है। हमने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी प्रभावशीलता देखी है जब उन्होंने कांग्रेस-सपा गठबंधन के लिए काम किया था।”

सूत्रों ने बताया कि जी-23 नेताओं ने पंजाब और छत्तीसगढ़ संकट, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में पराजय पर चर्चा की। एक तीसरे नेता ने कहा, “इन राज्यों में हार के कारणों की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट पर न तो सीडब्ल्यूसी में चर्चा हुई और न ही नेताओं के बीच। जैसे ए.के. एंटनी की रिपोर्ट [जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव परिणामों की जांच की थी], इस रिपोर्ट को भी दफनाया जा सकता है। ”