कांग्रेस होती तो ये ऐसी-तैसी न होती, देश में विपक्ष नहीं रहा- बोले राकेश टिकैत

टीवी कार्यक्रम में किसान नेता राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी में हुए समझौते को लेकर कहा कि कहा कि समझौता 10 हजार किसानों के बीच हुआ। वहां मृतक किसानों के परिवार, रिश्तेदार और सरकार के लोग शामिल थे।

टीवी कार्यक्रम में कांग्रेस का एजेंट कहे जाने पर राकेश टिकैत ने कहा कि अब देश में विपक्ष ही नहीं रहा। (एक्सप्रेस फोटो)

बीते दिनों लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी मुद्दे पर एक टीवी कार्यक्रम के दौरान जब एंकर ने किसान नेता राकेश टिकैत से सवाल पूछा कि आपको कांग्रेस का एजेंट कहा जाता है तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस होती तो ये ऐसी तैसी न होती और अब देश में विपक्ष नहीं रहा।

आजतक न्यूज चैनल पर इंडिया टुडे कॉन्क्लेव कार्यक्रम में लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा को लेकर चर्चा के दौरान जब एंकर अंजना ओम कश्यप ने किसान नेता राकेश टिकैत से सवाल पूछते हुए कहा कि आपको तो कांग्रेस का एजेंट कहा जाता है। तो इसपर जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि अगर कांग्रेस होती तो ये ऐसी तैसी न होती, कोई नहीं है, विपक्ष तो रहा ही नहीं…केस निपट गया।

इसके बाद जब एंकर ने सवाल किया कि वही लोग कह रहे हैं कि आप लखीमपुर खीरी में बीजेपी के एजेंट बन गए, आपने ही किसानों से समझौता कराया। इसके जवाब में राकेश टिकैत ने कहा कि देश को आग लगने से बचा लिया। कौन लोग यह कह रहे हैं कि डेड बॉडी रखकर पांच दिन तक उसपर समझौता ना करो। अपने परिवार के दो दिन रखकर दिखा दें वे। 

आगे राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी में हुए समझौते को लेकर कहा कि समझौता हुआ है अंतिम संस्कार तक, समझौता हुआ है लड़के की गिरफ्तारी पर। समझौता हुआ है जो एफआईआर दर्ज हुई है, जिसमें इनका गृह राज्य मंत्री 120 बी का मुजरिम है, उसका इस्तीफा, उसको पकड़ें, उसको जेल में डालें और दोनों को पांच दिन के रिमांड पर लें। तब ये बताएंगे कि गैंग में कौन कौन शामिल थे।

किसान नेता राकेश टिकैत के इस जवाब पर एंकर अंजना ओम कश्यप ने दोबारा सवाल करते हुए कहा कि अब तो किसान नेताओं में भी इसको लेकर मतभेद हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले आप बीजेपी की बी टीम बन गए हैं। एंकर के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वहां समझौता 10 हजार किसानों के बीच हुआ। उनके परिवार, रिश्तेदार और सरकार के लोग शामिल थे। समझौता जब हो जाए और जिस स्थिति में हो जाए, उसे कर लेना चाहिए। वहां समझौते में जो अधिकारी आए थे उनको सरकार ने पूरा पावर देकर भेजा था। सिर्फ अंतिम संस्कार तक के लिए समझौता हुआ है।