किसानी पर कांग्रेस ने पीएम मोदी का नाम लेकर चलाए शब्दबाण तो बोले बीजेपी प्रवक्ता- एक लाख झूठे मरे तो…

अभय ने पीएम मोदी को निशाने पर लेकर बीजेपी पर शब्दबाण चलाए तो गौरव ने कहा कि एक लाख झूठे मरे तक कांग्रेस के प्रवक्ता का जन्म हुआ। दोनों के बीच बहस इतनी तीखी रही कि एंकर अंजना ओम कश्यप को बीच में दखल देना पड़ा।

farmers, haryana हरियाणा: किसान करनाल में महापंचायत करेंगे। (फोटो-पीटीआई)।

किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे और बीजेपी के गौरव भाटिया के बीच तीखी बहस हुई। अभय ने पीएम मोदी को निशाने पर लेकर बीजेपी पर शब्दबाण चलाए तो गौरव ने कहा कि एक लाख झूठे मरे तक कांग्रेस के प्रवक्ता का जन्म हुआ। दोनों के बीच बहस इतनी तीखी रही कि एंकर अंजना ओम कश्यप को बीच में दखल देना पड़ा।

अभय दुबे ने कहा कि किसान मांग कर रहे हैं कि नए कृषि कानूनों को खत्म किया जाए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना जैसी अपनी योजनाओं का महत्व दिखाने में व्यस्त हैं। किसानों को 2,000 रुपये की मामूली रकम दी जा रही है जबकि उद्योगपति मित्रों को करोड़ों का लाभ मिल रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं। यह एक दिन में 17 रुपये होते हैं। लेकिन यही सरकार 2015 से 2019 के बीच उद्योगपतियों का हजारों करोड़ रुपये का ऋण माफ कर देती है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश की आंखें खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिए। वक्तव्यों और व्यवहार में ये अंतर क्यों है? क्या ये सही नहीं कि सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने राज्यों द्वारा समर्थन मूल्य के ऊपर दिए जा रहे बोनस को बंद करवा दिया? मोदी सरकार ने दिसंबर 2014 में किसानों के हक के भूमि के मुआवजा कानून को एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाकर पूंजीपतियों के हक में बदलने की कोशिश की? किसान निधि के नाम पर 6 हजार सालाना किसानों के खाते में डालने के कसीदे तो पढ़े जा रहे हैं, दूसरी ओर पिछले 6 सालों में 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर खेती पर टैक्स लगा दिया?

बीजेपी के गौरव भाटिया ने कहा कि जब देश में सुधार होते हैं तो उसका विरोध होता है। उन्होंने कहा कि जब देश में हरित क्रांति आई थी उस समय भी कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों का विरोध हुआ था। उन्होंने कहा, ‘हम आंदोलन से जुड़े लोगों से लगातार प्रार्थना करते हैं कि आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन बुजुर्ग भी वहां बैठे हैं। उनको ले जाइए। आंदोलन खत्म करिए। आगे मिल बैठकर चर्चा करेंगे, सारे रास्ते खुले हैं।

उनका कहना था कि सरकार किसानों के हितों की तरफ ही काम कर रही है पर विपक्ष के पेट में दर्द हो रहा है। यही वजह है कि ये लोग टीवी पर चिल्लाते रहते हैं। उनका कहना था कि देश का किसान मोदी राज में खुशहाल है। परेशान केवल वो लोग हैं जिनकी दुकानें बंद हो गईं हैं। उनका कहना था कि आंदोलन के नाम पर आम आदमी को परेशान किया जा रहा है। ये केवल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए हो रहा है।