किसानों की आमदनी कम हुई या ज्यादा, मांगेंगे इसका हिसाब- मोदी के पुराने बयान का जिक्र कर बोले टिकैत

केंद्र सरकार और पीएम मोदी द्वारा कई मौकों पर कहा गया है कि उनका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है।

Farmer Protest, Journalist किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो सोर्स – पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान अब सरकार से हिसाब मांगेंगे कि केंद्र द्वारा आय दोगुनी करने के वादे का क्या हुआ। दरअसल, केंद्र सरकार और पीएम मोदी द्वारा कई मौकों पर कहा गया है कि उनका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है। राकेश टिकैत ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘मोदी जी ने कहा था कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी होगी। 2015 में किसानों का बासमती धान 4600 बिक रहा था आज बिक रहा है 2600 रुपए कुंतल। आमदनी कम हुई या ज्यादा। अब इसका हिसाब भी मांगा जाएगा।’

वहीं आज केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसानों की आय दोगुनी करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने लक्ष्य साधा है लेकिन दो वर्ष में कोरोना वायरस के कारण यह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए केंद्र कई पहल शुरू कर रहा है और उनमें निवेश कर रहा है।

इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कहा कि संगठन किसानों को उनकी उत्पादन लागत समेत फसल की ”लाभदायक कीमत” देने के लिए दबाव बनाने के लिए आठ सितंबर को देशव्यापी आंदोलन करेगा। साथ ही केंद्र के नए कृषि कानूनों में ”सुधार” का आह्वान किया जाएगा जिसको लेकर किसानों का एक वर्ग विरोध कर रहा है।

किसान संगठन ने कहा कि केंद्र सरकार को प्रमुख कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान का प्रावधान जोड़ने के लिए या तो एक नया कानून लाना चाहिए या पिछले साल बनाए गए कृषि-विपणन कानूनों में बदलाव करना चाहिए।

मालूम हो कि सितंबर 2020 में बनाए गए तीन कृषि कानूनों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया है। हालांकि, विरोध कर रहे किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि नए कानून एमएसपी की सुरक्षा को खत्म करने का रास्ता साफ करेंगे और मंडियों को बड़े कॉरपोरेट घरानों की दया पर छोड़ देंगे।

गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का बचाव किया लेकिन साथ ही कहा कि अगर किसानों को लगता है कि कानूनों में कोई भी खंड उनके हितों के खिलाफ है तो सरकार उनसे बात करने के लिए तैयार है।