किसान आंदोलनः दुष्यंत चौटाला क्यों दें इस्तीफा, उन्होंने कृषि कानून बनाया है?- बोले अजय चौटाला

पानीपत में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जजपा प्रमुख ने कहा कि अगर उन्हें केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस कानून पर इस्तीफा ही मांगना है तो वे राज्य के 10 लोकसभा सदस्यों और पांच राज्यसभा सदस्यों से इस्तीफा मांगे।

dushyant chautala, jjp, farm laws तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

जननायक जनता पार्टी (जजपा) के प्रमुख अजय चौटाला ने बृहस्पतिवार (16 सितंबर, 2021) को विपक्षी पार्टियों और किसानों संगठनों पर हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि न तो चौटाला ने कृषि कानून बनाए हैं और न ही उन पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में वह इस्तीफा क्यों दें?

पानीपत में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जजपा प्रमुख ने कहा कि अगर उन्हें केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस कानून पर इस्तीफा ही मांगना है तो वे राज्य के 10 लोकसभा सदस्यों और पांच राज्यसभा सदस्यों से इस्तीफा मांगें। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के एक समूह ने वाहनों से कार्यक्रम स्थल पहुंच रहे जजपा नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन्हें काले झंडे दिखाए।

अजय चौटाला ने कहा कि अगर इस्तीफे से किसानों के मुद्दे के समाधान में मदद मिलती है तो दुष्यंत चौटाला समेत पार्टी के सभी 10 विधायकों के इस्तीफा उनकी जेब में पड़े हैं और जो इस मुद्दे का समाधान करे, वह इनके इस्तीफे ले जाए। जजपा नेता 25 सितंबर को पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल की जयंती पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए बुलाई गई बैठक को संबोधित कर रहे थे।

खट्टर की PM से मुलाकात, किसानों पर हुई बातः सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के प्रदर्शन सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात लगभग एक घंटे तक चली। किसानों के प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में भी चर्चा हुई और साथ ही पिछले दिनों करनाल में हुए किसानों के आंदोलन पर भी बात हुई।

‘गन्ने के दाम में बढ़ोतरी नाकाफी’: इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बृहस्पतिवार को कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से गन्ने के दाम में की गई बढ़ोतरी नाकाफी है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इन दिनों भाजपा-जजपा सरकार गन्ने का दाम सिर्फ 12 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर जमकर प्रचार व इवेंटबाजी कर रही है। जबकि खेती की बढ़ती लागत की तुलना में सभी फसलों की एमएसपी व गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी नाममात्र है।’’

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा साढ़े 9 साल के कार्यकाल में गन्ने के दाम में 165 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, यानी हर साल 16 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई। वहीँ, भाजपा सरकार के 7 साल के कार्यकाल में कुल 16 प्रतिशत यानी कांग्रेस से 10 गुना कम बढ़ोतरी हुई।’’