किसे कहते हैं कॉरपोरेट फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट, एसबीआई के मुकाबले मिलता है दोगुना रिटर्न

कुछ कंपनियों की ओर से कैश की जरुरत पड़ने पर कॉरपोरेट एफडी ऑफर की जाती हैं। जिनकी ब्‍याज दरें 10 फीसदी से ज्‍यादा भी देखने को मिलती है। इस पर एक्‍सपर्ट की काफी अलग राय है। इन एफडी में काफी सोच समझकर निवेश करने की जरुरत है।

FIXED DEPOSIT इन बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहा है ज्यादा ब्याज

पिछले कुछ महीनों में प्रमुख बैंकों द्वारा फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर दी जाने वाली ब्याज दर में गिरावट आई है, जिसकी वजह से उच्चतम टैक्‍स स्लैब और वरिष्ठ नागरिकों के बीच फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट की महत्‍वता कम देखने को मिल रही है। ऐसी स्थिति में फाइनेंशियल प्‍लानर लोगों को कॉर्पोरेट फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। जो देश के सबसे बड़े बैंक स्‍टेट बैंक ऑफ‍ इंडिया से दोगुना ज्‍यादा ब्‍याज दे रहे हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आख‍िर कॉरपोरेट फिक्‍स्‍ड डि‍पॉजिट क्‍या है, इसके क्‍या फायदे हैं और इसमें निवेश करने से किस तरह के जोखिम उठाने पड़ सकते हैं।

कॉर्पोरेट फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट क्या हैं?
कंपनियों की ओर से कॉर्पोरेट फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट ऑफर किया जाता है। जब कंपनियों को जल्दी में नकदी जुटाने की जरूरत होती है तो वे आकर्षक ब्याज दरों पर फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट का ऑफ‍र निकालते हैं। निवेशकों को निश्चित ब्याज दरों पर अलग-अलग अवधि के जमा प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।

एसबीआई से दोगुना ब्‍याज दरें
हाई रेटिंग वाली कंपनियां 1-5 साल के कॉर्पोरेट फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्‍याज दरें देती हैं। ब्याज दरें अवधि के आधार पर 8 प्रतिशत ते 10.75 प्रतिशत तक हो सकती हैं। कम रेटिंग वाली कंपनियां डिफ़ॉल्ट जोखिम के लिए उच्च रेटिंग वाले लोगों की तुलना में अधिक ब्याज दरों की पेशकश करती हैं। वहीं बात देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की बात करें तो साधारण फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर 5 साल की अवध‍ि के लिए 5.40 फीसदी ब्‍याज दर ऑफर करती हैं।

एक्‍सपर्ट क्‍या देते हैं सलाह
हालांकि, महामारी से पैदा हुए वित्तीय तनाव के कारण, कॉरपोरेट बैलेंस शीट पर जोर दिया गया है, यही वजह है कि विश्लेषकों की सलाह है कि कॉरपोरेट एफडी में निवेश करते समय चयनात्मक होना चाहिए। विश्लेषक आपकी पूंजी की बेहतर सुरक्षा के लिए केवल AAA-रेटेड कॉर्पोरेट एफडी में निवेश करने की सलाह देते हैं। वर्तमान में, एएए-रेटेड कॉरपोरेट एफडी निवेश की अवधि के आधार पर 6 से 8 फीसदी के बीच ब्याज की पेशकश करते हैं।

नहीं मिलती है कोई गारंटी
कॉरपोरेट एफडी में निवेश करते समय, यह याद रखना चाहिए कि बैंक एफडी के विपरीत, ये सुरक्षित नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि ये एफडी न तो किसी पूंजी सुरक्षा की गारंटी देते हैं और न ही ब्याज भुगतान का। मतलब साफ है कि अगर किसी कंपनी को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ता है तो निवेशक अपना रुपया गंवा सकते हैं।

टीडीएस काटा जाता है
कॉरपोरेट एफडी के मामले में, निवेशकों पर उस इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जिसके तहत वे आते हैं। इसलिए, हाईएस्‍ट टैक्स ब्रैकेट वाले लोग अधिक कर का भुगतान करेंगे। आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, यदि ब्याज 5,000 रुपए प्रति वर्ष की सीमा से अधिक है, तो कंपनी की जमा राशि से अर्जित ब्याज के इनकम सोर्स पर टैक्‍स (टीडीएस) काटा जाएगा। हालांकि, आप बैंक या एनबीएफसी को फॉर्म 15जी (या वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15एच) जमा करके टीडीएस पर बचत कर सकते हैं।

समय से पहले निकासी पर जुर्माना
यह बात याद रखने वाली है कि कुछ कॉर्पोरेट फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट तीन-छह महीने की अवधि के लिए समय से पहले निकासी की अनुमति नहीं देते हैं और यदि समय से पहले निकासी की जाती है, तो जमा पर कोई ब्याज नहीं लगता है। छह से बारह महीनों के बाद समय से पहले निकासी पर, कुछ कंपनियां प्रस्तावित ब्याज दर पर लगभग 2 से 3 फीसदी की कटौती करती हैं।

लॉकइन पीरियड
अधिकांश कंपनी एफडी तीन महीने की लॉक-इन अवधि के साथ आती हैं, जब तक कोई निवेशक राशि नहीं निकाल सकता है। लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद भी मैच्योरिटी से पहले निकासी का मतलब है पूरी एफडी को बंद करना। एफडी मैच्योर होने से पहले निकासी करने के मामले में एक निवेशक को कुछ ब्याज छोड़ना होगा।