कृषि कानूनः अब तो सरकार को शर्म आ जानी चाहिए…CJI के बयान का जिक्र कर बोले राकेश टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि संसद में गुणवत्तापूर्ण बहस की कमी है।

RAKESH TIKAIT बीकेयू के प्रवक्ता राकेश टिकैत। (फोटोः एजेंसी)

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि संसद में गुणवत्तापूर्ण बहस की कमी है। ऐसे में जो कानून पास होते हैं। उनके पीछे की मंशा का पता लगाना मुश्किल होता है। अब तो सरकार को शर्म आ जानी चाहिए तीनों काले कानून को रद्द करे और एमएसपी की गारंटी दे।

एनवी रमना ने 15 अगस्त को अपने भाषण में संसद के कामकाज की कड़ी शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि संसद में कार्यवाही के दौरान उचित बहस या चर्चा नहीं होती। सीजेआई ने कहा कि पहले संसद के दोनों सदनों में बहस पॉजिटिव और समझदारी भरी हुआ करती थी। हर कानून पर विशेष चर्चा होती थी, लेकिन अब संसद के बनाए कानूनों में खुलापन नहीं रहा। उन्होंने कहा कि संसद के कानूनों में स्पष्टता नहीं रही। हम नहीं जानते कि कानून किस उद्देश्य से बनाए गए हैं। यह जनता के लिए नुकसानदायक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वकील और बुद्धिजीवी सदनों में नहीं हैं।

उधर, सोशल मीडिया पर लोगों ने टिकैत को नसीहत दी तो कुछ ने उनका समर्थन भी किया। अशुतोष पांडेय ने लिखा-टिकैत जी, किसान नेता हो, भगवान बनने की कोशिश ना करो, नही तो पौंड्रिक बन जाओगे। जो प्रत्येक किसान के लिए बेहतर हो उसकी बात करो। अपने या फिर अपने जैसे बिचौलियों के हित की बात मत सोचो। खालिस्तानियों और देशद्रोहियों से मिलती हुई फंडिंग जिस दिन बंद हो गई उस दिन जमीन खिसक जाएगी।

दीपक ने लिखा-एक बात तो सही है की पांडे दुबे चौबे शर्मा सिंह आदि शुरू से ही किसान और किसानों का विरोध कर रहे हैं जबकि इन्हें खेती-बाड़ी का क से कबूतर भी पता नहीं। आरडी माथुर के हैंडल से ट्वीट किय़ा गया-नेता का मतलब क्या है। हमारे साहब तो राफेल ख़रीद भी खुद कर लेते है। टैक्निकल टीम की ज़रूरत नहीं है।

एक यूजर ने लिखा-यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए घर घर अलख जगाई जानी चाहिए। अगर यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया तो किसान आंदोलन की मांग मान सकता है मोदी अन्यथा यह तानाशाह, नहीं मानेगा।