कृषि कानूनः केंद्र ही नहीं BKU के राकेश टिकैत भी नहीं ले पा रहे पूरी नींद, बोले- दिन में मीटिंग, रात में सफर कर रहे…

राकेश टिकैत ने कहा कि आज कल ऐसा चल रहा है कि दिन में मीटिंग करता हूं और रात को सफर करता हूं। कम सोने को मिलता है।

rakesh tikait

न्यूज नेशन के रिपोर्टर ने जब किसान नेता राकेश टिकैत से पूछा कि आप थके हुए क्यों लग रहे हैं? इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि आजकल ऐसा चल रहा है कि दिन में मीटिंग करता हूं और रात को सफर करता हूं। कम सोने को मिलता है। रिपोर्टर ने जब पूछा कि आप पर किसी चीज का दबाव तो नहीं है? टिकैत ने कहा कि दबाव किस चीज का सारा समय मीटिंग में चला जाता है।

राकेश टिकैत ने बताया कि किसानों की मांग में कोई बदलाव नहीं है। हम यही चाहते हैं कि सरकार एमएसपी पर कानून बनाए और तीन कानूनों को वापिस ले। टिकैत ने कहा कि किसानों और आंदोलनकारियों के लिए परजीवी, आंदोलनजीवी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सोच समझकर किसानों के लिए भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।

टिकैत ने बताया कि गर्मियां आने वाली हैं तो प्रदर्शनस्थल पर किसानों के लिए पीने के पानी, बिजली का इंतजाम किया जाएगा। किसानों की कम होती संख्या पर टिकैत ने कहा कि जब आंदोलन में जरूरत पड़ेगी तो किसान फिर से आ जाएंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार से नाराज किसान इस बात का प्रचार करने लगा तो फिर क्या होगा? सरकार को ये सोचना चाहिए। किसान आंदोलन को अलग-अलग तरीकों से जारी रखा जाएगा। किसान महापंचायतों में यही दिख रहा है कि लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है।

राकेश टिकैत ने बताया कि गुरुवार को रेल रोको अभियान 12 बजे से 3-4 बजे तक रहेगा। हम तो रेल चलाने की बात कर रहे हैं। अगर रेल रोकेंगे तो संदेश देंगे कि रेल चले। गांव के लोग अपने हिसाब से रेल रोको अभियान का संचालन कर लेंगे।

टिकैत ने बताया कि सरकार की किसानों से बातचीत नहीं हो रही है। अभी बातचीत का कोई संकेत भी नहीं मिला है। राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली की जनता को समझना चाहिए कि हमारा आंदोलन आम आदमी के मुद्दों का आंदोलन है।