कृषि कानूनः जाट बिगाड़ेंगे केंद्र का खेल? कल शाह ने की मंत्रणा, आज संजीव बालियान के घर बड़ी बैठक

पंजाब से निकले किसान आंदोलन का हरियाणा और यूपी में अपनी पैठ बनाना बीजेपी को रास नहीं आ रहा है। दरअसल, ये वो इलाके हैं जहां जाट बहुतायत से हैं। जाटों का आंदोलन से जुड़ने का मतलब है कि यूपी, राजस्थान, हरियाणा के चुनाव में बीजेपी को लोहे के चने चबाने पड़ सकते हैं।

amit shah

पंजाब से निकले किसान आंदोलन का हरियाणा और यूपी में अपनी पैठ बनाना बीजेपी को रास नहीं आ रहा है। दरअसल, ये वो इलाके हैं जहां जाट बहुतायत से हैं। जाटों के आंदोलन से जुड़ने का मतलब है कि यूपी, राजस्थान, हरियाणा के चुनाव में बीजेपी को लोहे के चने चबाने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि बीजेपी ने अब जाटों को अपने पाले में करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। अमित शाह के निर्देश पर इसके लिए केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने मोर्चा संभाला है। बालियान पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेताओं में शुमार हैं। 2019 चुनाव में उन्होंने अजित सिंह को हराया था।

किसानों के आंदोलन को लेकर नित नई परिभाषाएं गढ़ रही बीजेपी को अब चिंता सताने लगी है। दरअसल, 26 जनवरी के बाद आंदोलन ने जिस तरह से अपना स्वरूप बदला, उसने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पेशानी पर बल ला दिए हैं। यही वजह है कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद अपनी टीम से कहा कि किसान आंदोलन को लेकर अपना रुख साफ करने की बेहद जरूरत है। इसके लिए एक सुनियोजित तरह से काम करने की सलाह उन्होंने बीजेपी नेताओं को दी। पार्टी ने भी उनकी बात को आत्मसात करते हुए तत्काल डैमेज कंट्रोल पर काम शुरू कर दिया है। यही वजह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज जाट नेता संजीव बालियान के घर पर इसे लेकर मंथन चल रहा है।

दरअसल बीजेपी को लग रहा है कि 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के बाद जिस तरह से जाटों ने आंदोलन को संभाला उसका नतीजा चुनाव में गंभीर हो सकता है। प. यूपी के साथ राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में जाटों का असर काफी ज्यादा है। हरियाणा में तो बीजेपी के अपने जाट नेता और सर छोटू राम के नाती चौधरी बिरेंद्र सिंह किसानों के पक्ष में खुलकर बोलने लगे हैं। बीजेपी ने इसी वजह से संजीव बालियान को आगे किया है।

कभी हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत बालियान की गिनती फायर ब्रांड नेताओं के तौर पर होती है। कई बार तीखे बयान देने के लिए उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। हालांकि, बीजेपी को उनका यह तेवर खासा पसंद आता है। तभी मोदी की पहली सरकार में उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया था। तब उन्हें कृषि राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी।

हालांकि, कुछ उनके कुछ बयानों की वजह से सरकार को किरकिरी झेलनी पड़ी और सितंबर 2017 में उनका मंत्री पद छीन लिया गया था। 2019 में बालियान ने मोदी और शाह के भरोसे को बरकरार रखते हुए कद्दावर जाट नेता चौधरी अजीत सिंह को शिकस्त दी थी। अजित सिंह का प. यूपी में क्या असर है, इसे राजनीतिक गलियारों में बखूबी जाना जाता है। उनके पिता चौधरी चरण सिंह को किसानों और जाटों के मसीहा का दर्जा हासिल था।