केंद्र सरकार ने कोरोना केसेज में बढ़ोतरी की अनदेखी की- वैज्ञानिक सलाहकारों के फोरम का दावा

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय वैज्ञानिकों के एक पैनल ने मार्च की शुरुआत में ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर और कोरोना वायरस वेरिएंट को लेकर मोदी सरकार बता दिया था। लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

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कोरोना की दूसरी लहर से आम लोगों के साथ सारा सिस्टम बेहाल है, लेकिन स्थिति को विकराल करने के लिए मोदी सरकार ही जिम्मेदार है। वैज्ञानिकों के एक फोरम का दावा है कि उन्होंने समय रहते केंद्र सरकार को चेतावनी दे दी थी। बावजूद उसके सरकार वोट बैंक को ध्यान में रखकर लोगों को कुंभ मेले की सैर कराती रही तो लोगों को सहूलियत मुहैया कराने की बजाए सरकार बंगाल में रैली करती रही।

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय वैज्ञानिकों के एक पैनल ने मार्च की शुरुआत में ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर और कोरोना वायरस वेरिएंट को लेकर मोदी सरकार बता दिया था। लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 4 भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को अलर्ट किया था। रिपोर्ट के मुताबिक- वैज्ञानिकों ने कहा था कि बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके। लेकिन सरकार ने कोरोना को लेकर कोई कदम नहीं उठाया।

एजेंसी ने कहा, भारत की सरकार वैज्ञानिकों की इस चेतावनी के बाद भी राजनीतिक चुनावी रैलियां कर रही थी वो भी बिना मास्क पहने। खुद पीएम मोदी भीड़ को देखकर अघाते नहीं थक रहे थे। दूसरी तरफ कुंभ में लाखों लोग रोजाना गंगा मैया में डुबकी लगे रहे थे। कृषि नीति में बदलाव के विरोध में नई दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन भी जारी रहा। यहां हजारों की संख्या में किसान बैठे हुए हैं।

रिपोर्ट में लिखा गया है कि उत्तर भारत के एक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने नाम ना उजागर करने की शर्त पर कहा है कि 2021 के मार्च के शुरुआत में ही कोविड-19 के नए वेरिएंट को लेकर भारत जेनेटिक कंसोर्टियम (Insacog) ने आगाह किया था। ये रिपोर्ट भारत सरकार के उच्च अधिकारियों के पास सीधे भेजी गई थी। रिपोर्ट उन अधिकारियों के पास गई थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को यह सारी ब्रीफिंग दी गई थी। एजेंसी का कहना है कि गौबा से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

कोरोना कितनी भयावह शक्ल ले चुका है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि केसों की संख्या 4 लाख के पार जा पहुंची है। रविवार को भारत में 3.92 लाख नए मरीज मिले हैं। जबकि 3,689 लोगों की मौत हुई है। शनिवार को देश में 4 लाख से ज्यादा केस सामने आए थे। केस जितनी तेज रफ्तार से बढ़ रहे हैं, सरकारें उतनी ही तेजी से शिथिल होती जा रही हैं। मरीजों को अस्पताल में बेड ही नहीं मिल पा रहा। जिसे मिल गया उसकी भी गारंटी नहीं कि कितनी देर तक वो सांसें ले पाएगा। ऑक्सीजन की किलल्त बनी हुई है।