केरलः लिंग भेद खत्म करने के लिए स्कूली किताबों की होगी समीक्षा, चिकित्सक की मौत के बाद सरकार का फैसला

उन्होंने ट्वीट किया, “विवाह को परिवार की सामाजिक स्थिति और धन का दिखावा नहीं होना चाहिए। माता-पिता को यह महसूस करना होगा कि बर्बर दहेज प्रथा हमारी बेटियों को सामान के रूप में नीचा दिखाती है। हमें इंसानों के रूप में उनके साथ बेहतर व्यवहार करना चाहिए।”

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ट्वीट किया कि केरल में घरेलू हिंसा से निपटने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है। (इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

केरल के कोल्लम जिले में 24 वर्षीय आयुर्वेद चिकित्सक की संदिग्ध आत्महत्या पर लोगों के आक्रोश के बाद, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को कहा कि राज्य की स्कूली पाठ्यपुस्तकों को लैंगिक समानता की संस्कृति को विकसित करने के लिए संशोधित किया जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया, “केरल की स्कूली पाठ्य पुस्तकों को संशोधित किया जाएगा और महिलाओं को अपमानित करने वाले शब्दों और वाक्यांशों को बाहर निकालने के लिए ऑडिट किया जाएगा। हमारे स्कूलों और कॉलेजों को ऐसे स्थान में बदलने के लिए कदम उठाए जाएंगे जो लैंगिक समानता और समान अधिकारों के विचार को गले लगाते हैं।”

इससे पहले बुधवार को एक ट्विटर थ्रेड में विजयन ने घोषणा की कि एक ऑनलाइन सेवा, ‘अपराजिता’, जिसका उपयोग पहले महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों को हल करने के लिए किया जाता था, का उपयोग अब महिलाओं के खिलाफ अपराधों और घरेलू शोषण की भी शिकायत दर्ज करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, “घरेलू दुर्व्यवहार की हालिया भयावह घटनाओं को देखते हुए केरल ने एक निष्पक्ष समाज बनाने के लिए और कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। इस अन्याय को खत्म करने के लिए सरकार और लोग एक साथ खड़े होंगे।” कहा कि “एक निष्पक्ष समाज वह है, जो महिलाओं और पुरुषों को समान मानता है।”

केरल में इस सप्ताह तीन विवाहित महिलाओं की मौत हुई है, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। राज्य मोटर वाहन विभाग के सहायक मोटर वाहन निरीक्षक किरण कुमार की पत्नी विस्मया वी नायर ने कुछ दिनों पहले उसने करीबी रिश्तेदारों के साथ व्हाट्सएप चैट पर अपने पति द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। इसके कुछ दिन बाद ही वह मृत पाई गईं। दहेज हत्या के आरोप में पुलिस ने मंगलवार को उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।

एक अन्य घटना में मंगलवार को 24 वर्षीय अर्चना ने कथित तौर पर आत्मदाह कर लिया, जिसकी एक साल पहले शादी हुई थी। अर्चना के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उसका पति सुरेश उसकी पत्नी से झगड़ा करता था और उसके परिवार से पैसे की मांग करता था। एक अन्य मामले में अलाप्पुझा के वल्लीकुन्नम में, 19 वर्षीय सुचित्रा अपनी ससुराल में फांसी पर लटकी पाई गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

इन सब घटनाओं की रिपोर्ट के बाद, मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को हर जिले में घरेलू संघर्ष समाधान केंद्र के संचालन को मजबूत करने का निर्देश दिया है, जो महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की शिकायतों को हल करने के लिए ऑनलाइन काम करता है। उन्होंने कहा कि दहेज संबंधी शिकायतों की जांच और समाधान के लिए एक राज्य नोडल अधिकारी को नियुक्त किया गया है। एक महिला एसआई नोडल अधिकारी की सहायता करेगी।

विजयन ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि समाज को अपनी प्रचलित विवाह प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है। उन्होंने ट्वीट किया, “विवाह को परिवार की सामाजिक स्थिति और धन का दिखावा नहीं होना चाहिए। माता-पिता को यह महसूस करना होगा कि बर्बर दहेज प्रथा हमारी बेटियों को सामान के रूप में नीचा दिखाती है। हमें इंसानों के रूप में उनके साथ बेहतर व्यवहार करना चाहिए।”