कोरोना की तगड़ी मार! सिर्फ अप्रैल में ही 70 लाख लोग हो गए बेरोजगार, बाजार में सुधार के फिलहाल नहीं आसार

सीएमआइई के डेटा के मुताबिक लॉकडाउन के पहले महीने यानी अप्रैल में करीब 12.2 करोड़ भारतीयों की नौकरी छिन गई थी।

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कोरोना मरीजों की तरह नौकरियां का भी दम घोंट रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ अप्रैल महीने में ही 70 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं। आने वाले दिनों में भी बेहतरी के आसार नहीं दिख रहे हैं। भारत की आर्थिक स्थिति पर नज़र रखने वाले प्राइवेट संगठन सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआइई) के मुताबिक अप्रैल में बेरोजगारी दर करीब 8 प्रतिशत थी। जो इस साल सबसे सर्वाधिक थी।

ऐसी स्थिति तब है जब पिछले लॉकडाउन के असर से अर्थव्यवस्था अभी तक नहीं उबर पाई है। पिछले साल लगे लॉकडाउन ने भी बड़ा कहर बरपाया था। सीएमआइई के डेटा के मुताबिक लॉकडाउन के पहले महीने यानी अप्रैल में करीब 12.2 करोड़ भारतीयों की नौकरी छिन गई थी। साथ ही कई आंकड़े यह भी कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान असंगठित क्षेत्र के 80 प्रतिशत कामगार अपने रोजगार से हाथ धो बैठे थे। इतना ही नहीं कई लोगों को दो बार के भोजन के भी लाले पड़ गए थे।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में 8 प्रतिशत पर आने से पहले मार्च में बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत थी। नौकरी बाजार में आ रही इस गिरावट के पीछे छोटे-छोटे ही सही लेकिन बार-बार लग रहे लॉकडाउन भी हो सकते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि कोरोना अब भी दहाड़ रहा है। अतएव आने वाले कल में जॉब मार्केट की पोजीशन सुधरने वाली नहीं दिख रही।

इस बार की बेरोजगारी पिछले साल से अलग है। अलग इस मायने में’ कि पिछले साल कोरोना का संक्रमण इतना तेज नहीं था। इस बार तो नौकरी जाने के साथ हर आदमी मौत के खतरे से भी जूझ रहा है। भारत के हर राज्य इस महामारी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। हर दिन लाखों की संख्या में केस आ रहे हैं और हजारों लोगों की मौत हर दिन हो रही रही है। कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से कई राज्यों में कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।

कोरोना प्रबंधन से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर त्रासदी का एक बहुत छोटा हिस्सा ही दिख पा रहा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी काफी लचर हो गई है। लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर और अस्पतालों में बेड पाने के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।