कोरोना की दूसरी लहर में पुणे ने किया कमाल, ज्यादा केस होने के बावजूद नहीं हुई स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी

पिछले साल जून और जुलाई के महीनों में पुणे में मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिससे यह अंदाज़ा हो गया था की आने वाले समय में मामले तेजी से बढ़ेंगे इस बात को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन बेड,आईसीयू, वेंटिलेटर आदि स्वास्थ सुविधाओं पर जोर दिया गया ।  

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कोविड -19 महामारी ने विश्व स्तर पर भयवाह संकट पैदा कर दिया है। ज्यादा जनसंख्या होने के कारण भारत के लिए यह संकट अधिक चुनौतीपूर्ण है। पिछले कुछ महीनों में इस महामारी का प्रकोप बड़े शहरों में तेजी से बढ़ा है। जिसके कारण देश के बड़े शहरों से अस्पताल, बेड ,वेंटिलेटर, ऑक्सीजन व रेमेडीसीविर जैसी आवश्यक मेडिकल सुविधाओं की कमी की खबरें आने लगी। जबकि पहली लहर के दौरान स्थितियां इतनी भयवाह नहीं हुई थी। पहली लहर के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित महराष्ट्र का पुणे शहर था ,लेकिन दूसरी लहर में एक कुशल प्रबंधन से वहां की स्थितियां पहली लहर के विपरीत है।

पुरे देश में पुणे एक ऐसा महानगर है जो आशा की एक किरण के रूप में दिखाई दे रहा है। हालाकिं पुणे से आने  कोविड -19 के  मामले अधिकांश राज्यों की राजधानियों की तुलना में बहुत अधिक है। पुणे में कोरोना वायरस से निपटने के शानदार उपायों और प्रबंधन की चर्चा पूरे भारत में हो रही है। कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने भी दूसरी लहर के दौरान मुंबई और पुणे की कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए उनके बेहतरीन काम की सराहना की थी। पिछले साल जून और जुलाई के महीनों में पुणे में मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिससे यह अंदाज़ा हो गया था की आने वाले समय में मामले तेजी से बढ़ेंगे इस बात को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन बेड,आईसीयू, वेंटिलेटर आदि स्वास्थ सुविधाओं पर जोर दिया गया ।

covid- 19 जैसी महामारी के बीच स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिसमें दिन-प्रतिदिन के कार्यों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को देना शामिल है। इस प्रकार महामारी के प्रबंधन के लिए कई मोर्चों पर एक साथ प्रयासों और समाज के सभी वर्गों के सहयोग और समर्थन की आवश्यकता होती  है। इसके अलावा, शिक्षा, उद्योग और आपातकालीन सेवाएं, विशेष रूप से समाज के गरीब वर्ग के बच्चों के लिए और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे स्थानीय अधिकारियों और अलग अलग मददगारों के सहयोग से संकट से अधिक मानवीय तरीके से निपटने में मदद मिल सकती है।

पुणे में यही देखने को मिला कि सरकारी अधिकारियों, गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट घरानों, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों ने एक अनुकरणीय सहयोग किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने इसे  पूर्ण स्वामित्व, जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ किया । सभी  मिलकर पीपीई, अस्पताल के बेड और वेंटिलेटर जैसी कोविड -19 आवश्यक चीजों की खरीद में मदद की।

मिशन वायु ने तीन सप्ताह से भी कम समय में सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरा करने के लिए न केवल  वरन विदेश से भी पैसा इकट्ठा किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और बड़ी संख्या में स्वास्थ्य की  देखभाल करने वाले कर्मियों व अच्छी तरह से प्रबंधित अस्पतालों, समाज की सेवा की भावना रखने वाले नागरिकों और संगठनों के बीच परोपकार की भावना किसी भी शहर में इस पैमाने के सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का प्रबंधन करने की कुंजी है।