कोरोना के खिलाफ वैक्सीन नहीं, बल्कि गर्म पानी और पेन किलर दवाएं असरदार: उत्तर कोरिया

नई दिल्ली. उत्तर कोरिया बगैर प्रभावी एंटी वायरल दवाओं की पहुंच के गैर वैक्सीन लगी आबादी के साथ कोरोना वायरस की मार झेल रहा है. 2020 में जब यहां कोरोना ने अपना कहर बरपाना शुरू किया, तो देश ने अपनी सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया और अब तक वह बाहरी चिकित्सा सुविधा लेने से भी इंकार करते रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक देश का मीडिया अब बुखार से जुड़ी तकलीफों से बचने के लिए पारंपरिक तरीके अपनाने को लेकर प्रचार कर रहा है.

हल्के कोविड के लक्षण हैं- गर्म पानी पियो
उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ पार्टी के अखबार रोडोंग सिमनुन में कोरोना के हल्के लक्षण वालों को सलाह दी गई है कि ऐसे लोगों को अदरक और शहद और विलो की पत्ती वाली चाय पीनी चाहिए. गर्म पेय पदार्थ कोविड के लक्षणों जैसे गले में दर्द, बलगम आदि को कम करते हैं. इसके साथ ही इससे लोगों में पानी की कमी नहीं होती है. विज्ञान कहता है कि अदरक और विलो की पत्ती से सूजन और दर्द मे तो आराम मिलने के प्रमाण हैं, लेकिन यह वायरस के उपचार के लिए नहीं है.

नमक के गरारे
देश के सरकारी मीडिया ने हाल ही में एक दंपति का साक्षात्कार किया जो सुबह शाम गर्म पानी से गरारे की सलाह देता है. यही नहीं मीडिया की रिपोर्ट बताती है कि प्योंग्यांग मं एंटीसेप्टिक सोल्यूशन बनाने के लिए हजारों टन नमक बुलाया गया है. वहीं कुछ अध्ययन कहते हैं कि गरारे या नाक को नमक के पानी से धोने से सामान्य सर्दी के वायरस से लड़ने में मदद मिलती है. लेकिन इस बात के प्रमाण नहीं मिलते हैं कि इससे कोविड के रुकने में मदद मिलती है. इसी तरह माउथवॉश करने से कोविड के फैलने की गति धीमी हो जाती है, इस बात के कुछ प्रमाण मिले हैं. लेकिन यह इंसानों पर पूरी तरह कारगर है यह कहना मुश्किल है. कोविड मुख्यतौर पर नाक और मुंह से निकले छोटे कणों के जरिए फैलते हैं, तो गरारे और नाक धोने से इसे एक हद तक रोका जा सकता है. लेकिन यह हर जगह पर लागू नहीं होता है. और एक बार अगर वायरस शरीर में प्रवेश कर गया तो वह अंगों के अंदर तेजी से फैलता है. यह वह जगह है जहां गरारों का असर नहीं जाता है.

दर्द निवारक और एंटीबायोटिक
उत्तर कोरिया के मीडिया पर मरीजों को दर्दनिवारक और एंटीबायोटिक खाने की सलाह दी जा रही है. अध्ययन कहता है कि दर्दनिवारक या बुखार उतारने की दवा से राहत मिल सकती है, लेकिन यह उपचार नहीं है. एंटीबायोटिक की जहां तक बात है वह बैक्टीरियल इन्फेक्शन में काम करती है ना कि वायरल इन्फेक्शन में, बल्कि इसे खाने से दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ जाता है.

उत्तर कोरिया में स्वास्थ्य तंत्र
उत्तर कोरिया में स्वास्थ्य तंत्र इसलिए स्थापित किया गया था ताकि ग्रामीण स्तर पर बुनियादी सेवाओं से लेकर सरकारी अस्पतालों (आमतौर पर शहरी केंद्रों में) विशेष उपचार और मुफ्त चिकित्सा मिल सके. लेकिन बीते कुछ सालों में प्रतिबंधों, सूखे जैसे चरम मौसम और कोविड के चलते अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. इसके अलावा सीमाओं को बंद करने और सख्त लॉकडाउन ने भी गहरा असर छोड़ा है. बाहर से आयात कमजोर होने की वजह से दवाओं और उपकरणों के अभाव का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर कोरिया ने पिछले साल चीन में बनी वैक्सीन के 30 लाख डोज को ठुकरा दिया था. वहीं चीन के विदेश मंत्री का कहना है कि हम उत्तर कोरिया के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं. कोरोना के खिलाफ सभी को मिलकर लड़ना होगा.

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FIRST PUBLISHED : May 20, 2022, 19:17 IST