कोरोना संकट के बीच हमले की तैयारी कर रहा चीन, भाजपा सांसद का दावा, बोले- अमित शाह ने की अनदेखी

डॉ स्वामी ने ट्वीट में कहा कि उन्होंने 2015 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके आवास पर चीन की चालबाजी के बारे में बताया था। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में यही बात अमित शाह को भी बताई गई थी। लेकिन सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया।

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भाजपा सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने देश की चिंताएं बढ़ाते हुए कहा है कि मुसीबत की इस घड़ी में चीन ने अपनी सेना, पीएलए की अतिरिक्त कुमुक वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार लद्दाख में भेज दी है ताकि भविष्य में वह हमला कर सके।

शुक्रवार को किए गए अपने ट्वीट में डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि हम लोग भी तैयार हैं लेकिन हमको लोगों की जान के रूप में बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ने पहले गलती की। हमें चीनी सैनिकों के वापस जाने तक कैलाश रेंज से हटना ही नहीं चाहिए था।

साथ ही दूसरे ट्वीट में डॉ स्वामी ने कहा कि उन्होंने 2015 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके आवास पर चीन की चालबाजी के बारे में बताया था। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में यही बात अमित शाह को भी बताई गई थी। लेकिन सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया। मेरी इन बातों को सुनकर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब ही नहीं दिया था और अमित शाह ने तो यह बात ही खारिज कर दी थी। भाजपा सांसद ने कहा कि अगर उसी वक्त चेतावनी पर ध्यान दिया गया होता तो आज यह दिन न देखने पड़ते।

सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के इन दावों पर ना तो सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है और ना ही भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कुछ भी बातें कही गई है। हालांकि ट्विटर पर काफी लोगों की प्रतिक्रिया देखने को मिली। उनके इस ट्वीट पर एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि डॉ सुब्रमण्यम स्वामी चीन के विशेषज्ञ हैं, इसलिए उनकी बात पर ध्यान देने की जरूरत है।

वैसे सुब्रमण्यम स्वामी इन दिनों लगभग रोज ही ट्विटर पर कुछ ऐसी बात छेड़ देते हैं जो सरकार को या भाजपा के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली होती है। कुछ दिनों पहले उन्होंने कहा था कि हिन्दुत्व के रथ पर अपराधी सवार हो गए हैं जो कि हिन्दुओं के शत्रुओं को फायदा पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एक दिन कोविड से लड़ने में सरकारी अक्षमता की बात कही और प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि कोविड से लड़ने का काम वे नितिन गडकरी को सौंप दें क्योंकि यह काम प्रधानमंत्री  कार्यालय (पीएमओ) के बस का नहीं है।