कोरोना: साल भर पहले अफसरों, पैनल ने ऑक्सीजन की किल्लत पर कर दिया था आगाह, फिर नवंबर में भी किया था अलर्ट

इसी बीच, एक अन्य अंग्रेजी अखबार ‘दि टेलीग्राफ’ की खबर में बताया गया कि बार-बार मिली चेतावनियों के बाद भी केंद्र सरकार कोरोना की आई दूसरी लहर को लेकर तैयार रहने में नाकाम हुई।

Coronavirus, COVID-19, Medical Oxygen

कोरोना संक्रमण की देश में दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन की किल्लत बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि, इससे जुड़े संकेत करीब एक साल पहले ही मिल गए थे। अफसरों ने ने इसके बाद नवंबर में इस चीज पर आगाह किया था।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में लॉकडाउन के एक हफ्ते बाद सेंटर फॉर प्लानिंग द्वारा गठित अफसरों के 11 में एक समूह ने इस बारे में अलर्ट किया था। यह एम्पावर्ड ग्रुप 6 (ईजी-6) था, जिसे प्राइवेट सेक्टर, एनजीओ और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करने के लिए लगाया गया था। 1 अप्रैल, 2020 को दूसरी बैठक के दौरान ग्रुप ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर चिंता जताई थी।

मीटिंग के मिनट्स में कहा गया था, “आने वाले दिनों में भारत को ऑक्सीजन सप्लाई में किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए सीआईआई इंडियन गैस एसोसिएशन के साथ सहयोग करेगा और ऑक्सीजन सप्लाई की किल्लत को कम करेगा।” नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत के प्रिंसिपल सांइटिफिक एडवाइजर के विजय राघवन, एनडीएमए सदस्य कमल किशोर और भारत सरकार के कई ईकाइयों के आधा दर्जन अफसर थे, जिसमें पीएमओ, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय आदि से भी लोग शामिल थे।

समूह द्वारा इस चेतावनी के बाद फॉलोअप में क्या ऐक्शन लिया गया? बैठक में शामिल एक अफसर से यह पूछे जाने पर उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार को बताया, “तय हुआ था कि डीपीआईआईटी इस मसले को देखेगा।” रिकॉर्ड बताता है कि बैठक के चार दिन बाद नौ सदस्यीय समिति बनाई गई थी, ताकि कोरोना महामारी के मद्देनजर मेडिकल ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराई जा सके। इस कमेटी के अध्यक्ष डीपीआईआईटी सचिव गुरुप्रसाद महापात्रा थे।

ईजी-6 के अलावा स्वास्थ्य पर संसदीय स्थायी समिति ने भी मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता का मसला उठाया था। सरकार से कहा था कि वह पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ावा दे, ताकि अस्पतालों में मांग के हिसाब से उसकी पूर्ति सुनिश्चित कराई जा सके।

इसी बीच, एक अन्य अंग्रेजी अखबार ‘दि टेलीग्राफ’ की खबर में बताया गया कि बार-बार मिली चेतावनियों के बाद भी केंद्र सरकार कोरोना की आई दूसरी लहर को लेकर तैयार रहने में नाकाम हुई। एक शीर्ष सरकारी रिसर्चर के हवाले से इसी रिपोर्ट में आगे बताया गया कि देश आत्मतुष्टि की कीमत अदा कर रहा है। नाम न बताने की शर्त पर उसने आगे बताया- यह बेहद निराशाजनक और दुखद है कि जो कुछ हो रहा है, उसे एकाएक रोका नहीं जा सकता है। एक और बड़ी लहर दस्तक दे सकती है, पर इस चेतावनी के बाद भी और तैयारी नहीं की गई।