कोरोना: UP में सिस्टम फेल, हम असहाय- अपने ही मंत्री, MLA-MPs ने बोला हल्ला तो सक्रिय हुए CM योगी आदित्यनाथ

संक्रमितों की संख्या (कुल 15 लाख, एक्टिव केस 2.25 लाख) के नाते यूपी का देश में चौथा नंबर है। लेकिन यहां चिकित्सा संसाधनों की किल्लत बहुत ज्यादा है।

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गंगा और यमुना में बहती लाशों के बीच कोरोना से जूझ रही यूपी सरकार पर कोविड प्रबंधन की खामियों को लेकर उनके अपने लोग बुरी तरह हमलावर हो उठे हैं। इतने अधिक कि खुद कोरोना पीड़ित रहे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को सक्रिय हो जाना पड़ा है। इन अपनों में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के एमपी, एमएलए शामिल हैं। इन लोगों ने अपने चुनाव क्षेत्रों से मिल रहे त्राहिमाम संदेशों को आवाज दी है। इनमें से कुछ खुद कोरोना से मर चुके हैं।

पिछले कुछ सप्ताह के बीच इन भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखे हैं, जिनके बाद मुख्यमंत्री को खुद सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा कर हालात की समीक्षा में जुटना पड़ा है। मुख्यमंत्री हाल ही में कोरोना से मुक्त हुए हैं।

छह मई को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने योगी को चिट्ठी लिखकर अपने क्षेत्र बरेली में कोविड कुप्रबंधन की शिकायत थी। और, आठ मई को सीएम बरेली जाकर समीक्षा में जुट गए थे।

इससे पहले योगी कैबिनेट में मंत्री बृजेश पाठक, बरेली के भाजपा एमएलए केसर सिंह (जो नहीं रहे), मोहनलाल गंज के एमएलए कौशल किशोर (जिनके भाई का निधन हो गया), बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी, भदोही के एमएलए दीनानाथ भास्कर और कानपुर के सांसद सत्यदेव पचौरी पत्र लिख चुके थे। इन्होंने लिखा था कि मदद की असंख्य गुहारों के बीच वे बेड और ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं दिला पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। कोविड रोग से भाजपा के अपने चार एमएलए मौत का शिकार हो चुके हैं। ऊपर लिखे बरेली के केसर सिंह के अलावा अकाल मृत्यु का शिकार होने वाले तीन अन्य विधायक हैं- लखनऊ, पश्चिम के सुरेश श्रीवास्तव, रायबरेली के दल बहादुर कोरी और औरैया के रमेश दिवाकर। अनेक जनप्रतिनिधियों ने अपने निकट संबंधी भी खोए हैं।

अभी रविवार की बात है फिरोजाबाद के भाजपा एमएलए पप्पू लोधी ने सोशल मीडिया में एक वीडियो अपलोड कर बताया था कि उनकी कोविड पीड़ित बीवी आगरा मेडिकल कालेज में तीन घंटे से बेड के बिना जमीन पर पड़ी हैं। विधायक खुद भी कोरोना पॉजिटिव थे।

संक्रमितों की संख्या (कुल 15 लाख, एक्टिव केस 2.25 लाख) के नाते यूपी का देश में चौथा नंबर है। लेकिन यहां चिकित्सा संसाधनों की किल्लत बहुत ज्यादा है। सर्वाधिक प्रभावित जिलों में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, गोरखपुर, बरेली और मुरादाबाद। ये शहर यूपी में सबसे बड़े शहर तो हैं ही, इन्हीं से देश के कुछ बड़े नेता भी चुन कर दिल्ली पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी के एमपी हैं तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से। राज्य के कुल कोविड मामलों के आधे इन्हीं दो जिलों से हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने राज्य के कुछ भाजपा नेताओं से बात की। सब ने कहा कि मदद मांगने वालों की बाढ़ है। हम उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे। मोहनलालगंज के विधायक कौशल किशोर ने जरूर कहा कि कुछ दिन से स्थितियां बेहतर हुई हैं। लेकिन मेरठ के एमपी राजेंद्र अग्रवाल बोले कि मदद देने के मामले में हमारा मुकाबला समय के साथ है। कुछ सांसदों ने ग्रामीण क्षेत्र की हालत को लेकर आगाह किया और कहा कि मामलों को न तो ठीक से दर्ज किया जा रहा है और न ही उनका प्रबंधन हो रहा है।

हालात को खराब बताने वालों के बीच भाजपा में सिद्धार्थनाथ सिंह समेत कई नेता ऐसे भी हैं जिनको स्थितियां बेहतर होती नजर आ रही हैं। संभव है यह बेहतरी नाराजगी भरी चिट्ठियों के बाद मुख्यमंत्री की सक्रियता का नतीजा हो। मुख्यमंत्री अब तक बरेली के अलावा वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या और मुरादाबाद जाकर हालात की समीक्षा कर चुके हैं।