क्या अब घर ही बन जाएंगे सिनेमाघर?

भरत समेत दुनिया के 40 देशों के सिनेमाघरों में ‘राधे’ रिलीज होगी। जी प्लेक्स पर 249 रुपए में और डाइरेक्ट टू होम चैनलों पर भी घर बैठे ‘राधे’ देखी जा सकेगी। तो क्या अब समय के साथ सिनेमाघर अतीत का हिस्सा बन जाएंगे?

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खबर बहुत सामान्य है कि सलमान खान की ‘राधे’ सिनेमाघरों के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म, ‘पे पर व्यू’ और डाइरेक्ट टू होम चैनलों पर एक साथ देखी जा सकेगी। यानी सिनेमाघरों के साथ-साथ लोग इसे अपने घर में बैठकर उसी दिन देख सकेंगे। कारोबारी लिहाज से इस खबर के निहितार्थ बहुत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि भारतीय सिनेमा व्यवसाय में यह पहला मौका होगा, जब किसी चोटी के सितारे की बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों और अन्य मंचों पर एक साथ रिलीज की घोषणा की गई है।

अब तक इन मंचों में सीधी प्रतियोगिता रही है और सिनेमाघर में फिल्म रिलीज होने के कुछ सप्ताह बाद ही फिल्म वीडियो या सैटेलाइट चैनलों पर प्रसारित होती थी। ऐसा फिल्म वितरकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था क्योंकि वे मोटी रकम देकर निर्माता से सिनेमाघरों में दिखाने के लिए फिल्में खरीदते थे। उनका तर्क होता था कि अगर कोई फिल्म सिनेमाघरों के साथ-साथ टीवी या सैटेलाइट चैनलों पर एकसाथ दिखाई जाएगी, तो लोग सिनेमाघरों में फिल्म देखने क्यों जाएंगे। और अगर साथ-साथ फिल्म रिलीज करना है तो वितरक मोटी रकम देकर फिल्मों को सिनेमाघरों में दिखाने के अधिकार क्यों खरीदें।

इसीलिए कोरोना काल में अमिताभ बच्चन की ‘गुलाबो सिताबो’ या अक्षय कुमार की ‘लक्ष्मी’ सिनेमाघरों के बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ही दिखाई गई थी और वितरकों ने उन्हें सिनेमाघरों में दिखाने के लिए नहीं खरीदा था। मगर ‘राधे’ की निर्माता जी स्टूडियो है, वितरक भी जी स्टूडियो है और उसका अपना ओटीटी चैनल भी है। वह जैसे चाहे फिल्म रिलीज करे, किसी का क्या नुकसान। मगर हर फिल्म के साथ ऐसा होना जरूरी नहीं है।

अब तक लोग केबल या डिश के जरिए टीवी देखते थे और उसके लिए हर महीने शुल्क चुकाते थे। दर्शक कोरोना काल में बनी स्थितियों के चलते तेजी से ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर मुड़े। उन्हें कुछ नया चाहिए था। ओटीटी के कार्यक्रमों में विविधता थी। माना जा रहा है कि पांच फीसद परंपरागत टीवी दर्शक ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर मुड़ गए। मगर ओटीटी पर हिंसा और अभद्र भाषा की भरमार थी। भारत में नेटफ्लिक्स, डिज्नी प्लस हॉटस्टार, अमेजन प्राइम वीडियो, जी फाइव, सोनी लिव जैसे 40 के आसपास (अमेरिका में 200 से ज्यादा) ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं। बीते साल जुलाई तक इसके 29 करोड़ उपभोक्ता थे और एक अनुमान के मुताबिक ओटीटी कारोबार 2025 तक चार हजार करोड़ का हो जाएगा।

ऐसे में जब बाजार आपके घर को सिनेमाघर में बदलने की हर जुगत भिड़ा चुका है, हर कोई ओटीटी की खूबियां गिना रहा है। कहा जा रहा है कि अब सिनेमाघर बंद हो जाएंगे। दरअसल, हम वापस 1930 के दशक के संक्रमण के दौर में पहुंचा दिए गए हैं, जब टीवी के आगमन के साथ यह कहा जाने लगा था कि अब सिनेमाघर बंद हो जाएंगे। भारत में युवा वर्ग सिनेमा और क्रिकेट का दीवाना है। स्टेडियम में क्रिकेट या सिनेमाघर में फिल्म देखना एक अलग ही एहसास है, जो मोबाइल या टीवी के जरिए नहीं मिल सकता। यही कारण है कि ‘जुरासिक पार्क’ जैसी फिल्म बनाने वाले हॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार स्टीवन स्पीलबर्ग कहते हैं, ‘सिनेमाघर में ही किसी फिल्म का वास्तविक आनंद लिया जा सकता है।’