क्या सरकार कोविड संबंधी जानकारियां और आंकड़े छिपा रही है? वैज्ञानिकों ने कहा हमें डाटा उपलब्ध कराएं

वैज्ञानिकों के समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि महामारी का डाटा या तो व्यवस्थित रूप से एकत्र नहीं किया या फिर उसे वैज्ञानिकों को उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।

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क्या सरकार कोविड संबंधी जानकारियां और आंकड़े छिपा रही है? मीडिया में इस तरह की चर्चा के बीच सूचना है कि वैज्ञानिकों और मेडिकल रिसर्चरों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश की है कि उनको कोविड-19 के प्रसार के पैटर्न और उसकी रोग की तीव्रता संबंधी डाटा उपलब्ध कराए।

इस वैज्ञानिक समूह में दो सौ सदस्य हैं। प्रधानमंत्री से उपर्युक्त अपील ऑनलाइन की गई है। इसमें कहा गया है कि देश में कोविड-19 की भीषणता का कारण मुख्यतः डाटा की अनुपलब्धता है। महामारी संबंधी डाटा या तो व्यवस्थित रूप से एकत्र नहीं किया गया या फिर वैज्ञानिक बिरादरी को यह दिया ही नहीं। इन जानकारियों के अभाव में रिसर्च प्रभावित होने की बात इन वैज्ञानिकों ने कही है। उन्होंने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की नीति का खामियाजा भी भुगतना पड़ा है। अब विदेशों से वैज्ञानिक उपकरण और रीजेंट मंगाना कठिन है। इनके बिना कोरोना वाइरस की जीनोम सीक्वेंसिंग की क्षमता प्रभावित होती है।

जानकारी न देने की मंशा की बात पत्रकार करन थापर ने भी कही है। वायर में प्रकाशित अपने लेख में वे कहते हैं कि सरकार ने पिछले साल से कोविड-19 के बारे में बात करने के लिए तीन व्यक्ति प्रमुख रूप से तय किए हैं। प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन, नीति आयोग के मेंबर वीके पॉल और आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव।

थापर ने कहा  कि एक साल के अन्दर उन्होंने इन लोगों का इंटरव्यू लेने की कई कोशिश कीं लेकिन ये लोग राजी नहीं हुए। अभी तीन दिन पहले इंडियाटुडे के राजदीप सरदेसाई भी एक बड़े वैज्ञानिक से कुछ निकलवाने की कोशिश करते रहे और वैज्ञानिक हर सवाल को यह कह कर टालते रहे कि यह उनके कामकाज की परिधि से बाहर का सवाल है।

बताते चलें कि देश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 3,86,452 नए मामले सामने आए हैं, जो अब तक के सर्वाधिक दैनिक मामले हैं। इसी के साथ देश में अब तक कुल 1,87,62,976 लोग संक्रमित हो चुके हैं।